केंद्र सरकार द्वारा 10 जुलाई को पेश आम बजट में पंजाब सरकार को उम्मीद के मुताबिक आर्थिक राहत तो नहीं मिली। फिर भी, प्रदेश के वित्त एवं योजना मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा सीमित साधनों के बीच मोदी सरकार की तर्ज पर सभी वर्गों को कुछ न कुछ देने की तैयारी कर चुके हैं।
बीते सोमवार पंजाब कैबिनेट द्वार मंजूर किए गए वर्ष 2014-15 के बजट प्रस्तावों को वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा बुधवार को विधानसभा में पेश करेंगे।
‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने संकेत दिए कि बजट में सूबे की जनता पर करों को कोई नया बोझ नहीं डाला जाएगा। यहां पेश हैं वित्त मंत्री से बातचीत के प्रमुख अंश-
आम आदमी, छोटे व्यापारी और किसानों का हित
. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद यह आपका पहला बजट है। इसे तैयार करते वक्त किन बातों को ध्यान में रखा?
- अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार हमेशा ही लोक हितों को को ध्यान में रखकर नीतियां तैयार करती हैं। यह बजट भी इसी कड़ी का हिस्सा होगा। 2014-15 का बजट विशेष रूप से आम आदमी, छोटे व्यापारी और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
. और कौन सा खास बिंदु इसका हिस्सा होगा?
- बजट विकासोन्मुखी होगा। चालू वित्त वर्ष के दौरान प्रदेश तरक्की की नई राह पर आगे बढ़ेगा। सरकार प्रदेश के विकास के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है।
आर्थिक हालात को सुधारेगी केंद्र की एनडीए सरकार
. पंजाब को केंद्र से उम्मीद के मुताबिक आर्थिक राहत नहीं मिली। ऐसे में काम कैसे चलेगा?
- भारत सरकार पंजाब को आर्थिक मदद देना चाहती है लेकिन इस वक्त केंद्र में आर्थिक स्थिति ऐसी है कि फौरी तौर पर प्रदेश को कोई बड़ी वित्तीय मदद प्राप्त नहीं हो पाई। आने वाले में समय में निश्चित तौर पर पंजाब के आर्थिक हालात को सुधारने में केंद्र की एनडीए सरकार सहायक सिद्ध होगी।
. कर ढांचे में कोई परिवर्तन करने जा रहे हैं?
- बजट ऐसा होगा, जिससे आम आदमी पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। बजट से छोटे व्यापारियों और किसान को राहत मिलेगी।
. अलग-अलग वर्गों के लिए इस बजट में क्या खास होगा?
- शिक्षा, बिजली, उद्योग-व्यापार, युवक सेवाएं आदि सभी पक्षों को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया गया है। सभी वर्गों को न कुछ जरूर दिया जाएगा।
आर्थिक स्थिति को आगे बढ़ाना एक चुनौती
प्रदेश के 1.02 लाख करोड़ के कर्ज का पुनर्निधारण और आतंकवाद के समय सुरक्षा बलों पर खर्च किए करोड़ों रुपये की भरपाई किए जाने संबंधी पंजाब की मांग पर केंद्र द्वारा कोई ठोस फैसला अभी सामने नहीं आया है।
ऐसी हालत में वित्त मंत्री ढींढसा के सामने उपलब्ध सीमित साधनों से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को आगे बढ़ाना एक चुनौती है। वह इस कसौटी पर कितना खरा उतरते हैं, इसका जवाब बुधवार को प्रश्नकाल के बाद विधानसभा में पेश होने वाले बजट से मिलेगा।