पैरा इंटरनेशनल खिलाड़ियों ने पंजाब में सरकारी नौकरी की मांग को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आवास के सामने धरना प्रदर्शन किया। साथ ही 72 घंटे के भीतर मांगों को पूरा नहीं करने पर भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी। सुबह करीब ग्यारह बजे ये पैरा इंटरनेशनल खिलाड़ी सीएम आवास की ओर पहुंचे और वहां सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
खिलाड़ियों के पहुंचते ही सीएम हाउस के बाहर सुरक्षा कर्मियों में अफरा-तफरी मच गई। न्याय की मांग करते हुए खिलाड़ियों ने अपने जीते हुए पदक और पंजाब सरकार की ओर से दिए गए पंजाब के सबसे प्रतिष्ठित अवार्ड महाराजा रणजीत सिंह और स्टेट अवार्ड को दिखाते हुए कहा कि एक ओर पंजाब सरकार खिलाड़ियों को अवार्ड्स से नवाजती है और दूसरी ओर यही खिलाड़ी मुफलिसी की जिंदगी गुजारते हैं।
इस मौके पर पंजाब सीएम के ओएसडी एमपी सिंह ने पैरा इंटरनेशनल खिलाड़ियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने रखा जाएगा। इसके बाद पैरा इंटरनेशनल खिलाड़ियों ने 72 घंटे का अॅल्टीमेटम दिया और सीएम आवास के सामने से हट गए। इस मौके पर खिलाड़ियों से कहा गया कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अभी आवास में नहीं हैं।
मांग नहीं हुई पूरी तो करेंगे भूख हड़ताल
महाराजा रणजीत सिंह अवार्ड से सम्मानित पैरा इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी संजीव कुमार ने कहा कि पंजाब सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया गया है। इस बीच यदि सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो सभी खिलाड़ी 72 घंटे के बाद रैली मैदान सेक्टर-25 में भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।
पुलिस ने हटाकर किया साइड
सीएम हाउस के बाहर पैरा और दिव्यांग खिलाड़ियों द्वारा धरना प्रदर्शन शुरू करने के करीब दस मिनट बाद चंडीगढ़ पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे। उन्होंने खिलाड़ियों को कहा कि आपके पास यहां की परमीशन नहीं है। खिलाड़ियों को पुलिस ने यहां से सेक्टर-25 के रैली मैैदान में छोड़ दिया।
लेकिन वहां भी खिलाड़ियों को कहा गया कि यहां की अनुमति भी उनके पास नहीं है। इस मामले में खिलाड़ियों ने कहा कि सेक्टर-25 के रैली ग्राउंड को धरना प्रदर्शन के लिए बनाया गया है। इसमें किसी से अनुमति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
हम चमकाते हैं नाम, मिलता नहीं काम
पॉवर लिफ्टिंग इंटरनेशनल खिलाड़ी जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमेशा ही सरकार की तरफ से खिलाड़ियों के साथ भेदभाव किया गया है। पैरा खिलाड़ी इस मामले में पहले भी कई बार सरकार को पत्र लिख चुके हैं व मुलाकात भी कर चुके हैं। इसके बाद भी कोई नौकरी या कैश अवार्ड की घोषणा नहीं होती है। जिसकी वजह से खिलाड़ी विवश होकर सड़क पर उतरे हैं। जितेन्द्र ने बताया कि वह दो इंटरनेशनल मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और 2013 में स्टेट अवार्ड प्राप्त कर चुके हैं।
खिलाड़ियों की प्रमुख मांग
-इंटरनेशनल पदक विजेता, अवार्ड से सम्मानित खिलाड़ियों को सरकार द्वारा नौकरी दी जाए।
-कैश अवार्ड की पॉलिसी में परिवर्तन किया जाए।
-पैरा और दिव्यांग खिलाड़ियो के लिए नई पॉलिसी बनाई जाए।
-कैश अवार्ड हरियाणा सरकार के बराबर करना चाहिए।