चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट केसीईओ को निजी तौर पर पेश होकर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए किए प्रबंधों की जानकारी देने को कहा है। इसके साथ ही मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई है।
पिछली सुनवाई पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) से पूछा गया था कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह एयरपोर्ट कितना विकसित हो चुका है। यह भी पूछा था कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल की जाए।
वीरवार को बेंच को बताया गया कि पिछले दिनों फ्रांस के राष्ट्रपति का विमान यही उतरा था। यहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने के लिए माकूल सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं।
यह भी बताया कि इंडिगो कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने की अनुमति मांगी है, यह अर्जी फिलहाल विचाराधीन है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कैंटीन और पांच स्नैक्स बार खोलने को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा कस्टम, इमिग्रेशन व न्यू इंटिग्रेटेड टर्मिनल की इमारतें बनकर तैयार हो चुकी हैं। उपकरण भी लगाए जा चुके हैं।
इस पर याची के वकील ने कहा कि रनवे की लंबाई और वाच टावर की ऊंचाई कम है। यह भी कहा कि यहां कैट-3 व्यवस्था होनी चाहिए। इस व्यवस्था से यदि पायलट को कुछ दिखाई भी न दे रहा हो, तब भी फ्लाइट सुरक्षित उतर सकती है, लेकिन अभी तक कैट-2 व्यवस्था ही चल रही है।
हाईकोर्ट ने इस पर सीईओ से पूछा है कि एयरस्ट्रिप्स बढ़ाने और वाच टावर तथा रनवे की लंबाई बढ़ाने पर अगली सुनवाई को जवाब दिया जाए। पिछली सुनवाई पर पंजाब सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने को लेकर पत्र भेज दिया था। उद्घाटन केवक्त भी उनसे ऐसा आग्रह किया गया था। उधर, हरियाणा ने भी कहा था कि केंद्र सरकार को उड़ानें शुरू करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है।
संभावित विदेशी निवेश पर भी कुप्रभाव का आरोप:
याचिका में आरोप था कि अभी तक यहां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गईं, जिससे कि विदेशी निवेश पर भी असर पड़ रहा है। मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन ने एडवोकेट विभब जैन के माध्यम से दायर याचिका में कहा था कि 939 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एयरपोर्ट पर सार्वजनिक पैसा लगा है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी को 300 एकड़ जमीन भी उपलब्ध कराई गई। फिर भी एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं करने से सार्वजनिक व्यय करने के बावजूद वित्तीय नुकसान हो रहा है। याचिका में कहा था कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं होने व अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के अभाव में पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के उद्योग में होने वाले संभावित विदेशी निवेश पर भी कुप्रभाव पड़ रहा है।
लिहाजा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी को समय सीमा में बांधा जाए। याचिका में मांग की गई थी कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू न कर पाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जल्द शुरू की जानी चाहिए।
याचिका में केंद्रीय सिविल एविएशन मंत्रालय, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी, हुडा, गमाडा व केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया गया था।