हरियाणा में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पिछले साल मार्च महीने में बर्बाद फसल के मुआवजे के चेक बाउंस हो गए हैं। अभी तक मुआवजा भी पूरा नहीं मिल सका है, जबकि अप्रैल महीने में वित्त मंत्री ने एक महीने में मुआवजा देने का एलान किया था।
मुआवजा पाने और बाउंस चेकों के एवज में दोबारा चेक जारी करने की मांग को लेकर अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
भारतीय किसान संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष ओम सिंह की ओर से एडवोकेट प्रवेश यादव के माध्यम से दायर याचिका पर जस्टिस एसके मित्तल व जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की डिवीजन बेंच ने सरकार को नोटिस जारी कर एक मार्च तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका में कहा गया है कि गुड़गांव जिले के फर्रुखनगर तहसील के करीब दो हजार ग्रामीणों की फसल पिछले साल मार्च महीने में बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के कारण बर्बाद हो गई थी। इस पर तहसीलदार ने गिरदावरी कर 41 करोड़ 75 लाख रुपये मुआवजा देने की रिपोर्ट उपायुक्त गुड़गांव को भेजी थी।
आरोप है कि यह मुआवजा पूरा नहीं मिल पाया। इसमें से 15 करोड़ रुपये ही जारी हुए और बाकी के 26 करोड़ 75 लाख रुपये जल्द देने की बात कही गई। इसके बाद जून महीने में 18 करोड़ 30 लाख ही जारी हुए और तहसीलदार की ओर से उपायुक्त को बार-बार पत्र लिखने के बावजूद मुआवजा पूरा नहीं मिल पाया।
इसके विपरीत पहले दिए गए मुआवजे के कुछ चेक बाउंस हो गए। बैंक ने चेक बाउंस होने का कारण अपर्याप्त राशि होना बताया। चेक बाउंस होने के कारण किसानों के खातों से जुर्माने की राशि भी कट गई।
याचिका में मांग की गई है कि पूरा मुआवजा जारी किया जाए, वह भी 24 प्रतिशत ब्याज समेत और जो चेक बाउंस हुए, उनके एवज में दोबारा चेक जारी किए जाएं। हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब-तलब कर लिया है।