लोक अदालत ने एक कार मालिक की अर्जी पर सुनवाई करते हुए इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम के 4.20 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है।
अगर कंपनी तीस दिनों में यह रकम शिकायतकर्ता को नहीं देती है तो उसे नौ फीसदी ब्याज के साथ रकम चुकानी होगी।
मोहाली निवासी बलधीर सिंह गिल ने स्थायी लोक अदालत में अर्जी दी थी। इसमें कहा गया था कि उसकी कार 11 मई-2011 को फेज 3बी2 से चोरी हो गई थी।
पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने उसका क्लेम रद्द कर दिया। केस की सुनवाई के दौरान भी कंपनी ने यही पक्ष रखा कि गिल ने अपनी कार की सुरक्षा करने में लापरवाही बरती। वह कार में चाभियां छोड़ कर चले गए।
वहीं, गिल का कहना था कि उसने एक रेहड़ी वाले से कुल्फी खरीदी थी। लौट कर वह कार स्टार्ट करने लगा तो कुल्फी वाले ने नोट बदलने के लिए कहा।
वह कार बंद करके चाभी वहीं छोड़ कर नोट बदलने चला गया। इस बीच कार चोरी हो गई।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता कार के बहुत पास था, कार उसे दिख रही थी। इसलिए इसमें लापरवाही की कोई बात नहीं है।
अदालत ने इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम के 4.20 लाख रुपये शिकायतकर्ता को अदा करने के आदेश दिए। साथ ही यह भी आदेश दिया कि अगर कंपनी तीस दिनों के अंदर यह रकम अदा नहीं करती है तो उसे क्लेम रिजेक्ट करने की तारीख 29 अप्रैल-13 से इस रकम पर नौ फीसदी ब्याज भी देना होगा।