कैंसर पीड़ितों का बीमा कराकर मौत के बाद में हादसा दिखाकर क्लेम हड़पने वाला गिरोह एचआईवी पीड़ित मरीजों के परिवारों के संपर्क में भी था। एसटीएफ की जांच में यह बात सामने आई है, हालांकि फिलहाल एसटीएफ ने ऐसे किसी मामले से पर्दा नहीं उठाया है। सोनीपत एसटीएफ ने वीरवार को रोहतक पीजीआई से कैंसर मरीजों का रिकॉर्ड कब्जे में लिया है।
साथ ही टीम ने कैंसर व एचआईवी का उपचार करवाने वाले 54 मरीजों की लिस्ट देकर 24 घंटे में इनकी पूरी डिटेल उपलब्ध करवाने को कहा है। एसटीएफ सोनीपत ने 19 अप्रैल को कैंसर रोगियों की मौत को हादसा दिखा क्लेम हड़पने के मामले में एक गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ा था। गिरोह के सरगना गांव सेवली निवासी पवन भौरिया, रिंढाना निवासी मोहित और गुमाना निवासी विकास से पूछताछ में कई तथ्य उजागर हुए हैं।
मेडिसिन विभाग भी संदेह के दायरे में आया
एसटीएफ सोनीपत की टीम ने एचआईवी पीड़ितों की जो डिटेल मांगी है, उसमें मरीजों की उपचार के दौरान की फाइल व अन्य सामग्री शामिल हैं। एसटीएफ को कैंसर के अलावा एचआईवी के मरीजों की मौत के कुछ मामलों में भी संदेह है। इस संदेह ने मेडिसन विभाग को भी संदेह के दायरे में ला दिया है। एसटीएफ ने 54 मरीजों का ब्योरा उपलब्ध करवाने के लिए प्रबंधन को शुक्रवार शाम तक का समय दिया है। टीम में एसआई सुरेंद्र, एएसआई तेजवीर सिंह, विकास समेत चार सदस्य शामिल थे।
पीजीआई रोहतक से कैंसर के मरीजों से जुड़ा रिकॉर्ड कब्जे में लिया गया है। रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस सभी पहलुओं को देख रही है।
- सतीश देशवाल, प्रभारी, सोनीपत इकाई, एसटीएफ
सड़क हादसे के लिए हर दो माह में खरीदते थे नई कार
कैंसर पीड़ितों का बीमा कराने के बाद सड़क दुघर्टना दिखाकर क्लेम लेने के मामले में एसटीएफ की जांच में अहम जानकारी हाथ लगी है। कैंसर पीड़ित की मौत के लिए सड़क हादसा दर्शाने को हर बार गिरोह नई कार खरीदता था। कार पर थोड़ी खरोंच आते ही उसे बेच दिया जाता था।
अभी तक गिरोह के 20 से अधिक कार खरीदने की बात सामने आई है। एसटीएफ के सूत्रों के अनुसार कैंसर पीड़ित के परिवार के सदस्यों को विश्वास में लेने के बाद उसका बीमा कराने के बाद सड़क हादसा कराने के लिए गिरोह का सरगना खुद और गिरोह के गुर्गों के नाम से कार खरीदता था।
सेक्टर दो निवासी एक गिरोह के गुर्गे के नाम भी कुछ कार खरीदने की बात जांच में सामने आई है। दो माह में खरीदी गई कार को दिल्ली या फिर हरियाणा में बेच दिया जाता था। पूछताछ में पता चला है कि गुर्गे एक दो नहीं दस से अधिक बार तब तक पीड़ित को सड़क पर लिटाकर कुचलते रहते थे, जब तक की उसकी मौत न हो जाए। गिरोह का सरगना कार खरीदने के लिए जरूर जाता था।
एसटीएफ ने कई स्थानों पर दी दबिश
एसटीएफ ने जिले में कई स्थानों पर दबिश दी। कैंसर पीड़ितों के परिजनों से भी पूछताछ की गई। गिरोह के फरार गुर्गों को जल्द पकड़ने का दावा किया है। कैंसर पीड़ितों के परिजनों से भी पूछताछ की गई।