बीमा कंपनी ने दी थी अपील
बीमा कंपनी ने अपनी अपील में कहा था कि यह संयुक्त लापरवाही का मामला बनता है, पीड़ित ने दोपहिया वाहन चलाते हुए हेलमेट नहीं पहना था। हाईकोर्ट ने कहा कि कैप्टन बलदेव सिंह (पीड़ित के दादा) की गवाही के अनुसार पीड़ित पगड़ीधारी सिख था और दुर्घटना के समय उसने पगड़ी बांध रखी थी। पगड़ी धारी सिख के मामले में हेलमेट न पहनना लापरवाही के दायरे में नहीं आता। हाईकोर्ट ने कई मामलों का हवाला देते हुए कहा कि हेलमेट न पहनने को योगदानात्मक लापरवाही नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि दुर्घटना इससे प्रभावित हुई।
बीमा कंपनी का यह तर्क भी खारिज कर दिया गया कि वेतन से यात्रा भत्ता हटाया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि वेतन से मिलने वाले सभी लाभों को मुआवजे की गणना में शामिल किया जाना चाहिए। अदालत ने पीड़ित की ओर से दायर अपील पर मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को समीक्षा के लिए उपयुक्त माना। पीड़ित की 100 प्रतिशत दिव्यांगता को देखते हुए अदालत ने ट्रिब्यूनल की ओर से तय 70.97 लाख रुपये की राशि बढ़ाकर 1.95 करोड़ रुपये कर दी। अदालत ने भविष्य की संभावित आय हानि, चिकित्सा खर्च और अन्य कारकों को ध्यान में रखकर यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दुर्घटना पीड़ित के जीवन को पूरी तरह से बदल चुकी है, इसलिए उसे न्याय संगत मुआवजा मिलना चाहिए।