चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि रूट परमिट न होने को आधार बनाकर बीमा कंपनी मोटर क्लेम खारिज नहीं कर सकती, जब तक उसका दुर्घटना से सीधा संबंध साबित न हो। आयोग ने मोहाली निवासी सुखवीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया। आयोग ने कंपनी को 3.07 लाख रुपये का बीमा क्लेम और 25 हजार रुपये हर्जाना अदा करने के आदेश दिए।
शिकायतकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रमन सिहाग ने बताया कि 9 जुलाई 2019 को सेक्टर-25/38 लाइट पॉइंट के पास ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस समय वाहन को चालक गुरचरण सिंह चला रहे थे। हादसे में ट्रक को भारी नुकसान हुआ, जिसके बाद उसे वर्कशॉप में मरम्मत के लिए भेजा गया। 27 सितंबर 2019 को वर्कशॉप ने 3.07 लाख रुपये का बिल जारी किया। सुखवीर सिंह ने बीमा क्लेम दायर किया। कंपनी ने सर्वेयर से निरीक्षण करवाया लेकिन बाद में यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि ट्रक के पास केवल पंजाब का रूट परमिट था जबकि दुर्घटना चंडीगढ़ सीमा में हुई। इसे पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन बताया गया।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यदि चंडीगढ़ के लिए अलग परमिट नहीं भी था, तो इसका दुर्घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इसलिए केवल इस आधार पर क्लेम अस्वीकार करना उचित नहीं है। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्धारित राशि निर्धारित समय में अदा करने के निर्देश दिए हैं।