वेस्ट मैटेरियल को गमलों में तब्दील करने के लिए उन्होंने न तो किसी यूट्यूब वीडियो को देखा और न ही कहीं से इसे सीखा। हालांकि वह अक्सर रॉक गार्डन व सेक्टर-37 स्थित कला सागर जाते रहे हैं। वहां से उन्हें कई सारे आइडिया मिले और उसे अपने तरीके से बगीचे में लागू किए।
गमलों के साथ किचन गार्डन भी बनाया
कोहली के पास 70 से ज्यादा गमले होंगे। इसके अलावा उन्होंने एक किचन गार्डन बनाया हुआ है। इसमें वह मौसमी सब्जियां उगाते हैं। इस समय उनके किचन गार्डन में मूली, शलजम, गाजर, चुकंदर, पत्ता गोभी, धनिया, ब्रोकली व अन्य सब्जियां उगी हुई हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सभी सब्जियां आर्गेनिक हैं क्योंकि वह कोई भी पेस्टीसाइड का इस्तेमाल नहीं करते हैं। आसपास के लोगों को भी वह अक्सर अपने किचन गार्डन की सब्जियां देते हैं।
पेड़-पौधों की देखभाल से मिलती है सकारात्मक ऊर्जा
नरेश कोहली ने बताया कि वह अपने गार्डन में रोजाना दो घंटे का समय गुजारते हैं। ऑफिस से लौटने के बाद वह अपना वक्त बगीचे में ही बिताते हैं। छुट्टी वाले दिन उनका सारा समय पेड़ पौधों की कटाई छंटाई में बीतता है।
उन्होंने बताया कि जब वह पौधों के पास रहते हैं तो उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मन शांत होता है और एक सुकून मिलता है। उनके बगीचे को देखने के लिए अब तक नेकचंद के बेटे अनूप सैनी व कला सागर के विजय गोयल आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि कई लोग उनसे उनका गार्डन देखने के लिए बोल चुके हैं, लेकिन कोरोना की वजह से वह ज्यादा लोगों को आने नहीं देते।