अगर आप भी शताब्दी में सफर करते हैं तो ये खबर आपके बड़े काम की है। तसल्ली से पढ़ लीजिए और सावधान रहें, नहीं तो काफी परेशानी उठानी पड़ेगी। दरअसल, शताब्दी ट्रेन के खाना में मरा हुआ कीड़ा मिलने और यात्री के भूखा रहने पर उपभोक्ता फोरम ने रेलवे को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया है। उपभोक्ता फोरम ने रेलवे को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को खाना के 130 रुपये वापस करे।
साथ ही 10 हजार रुपये मुआवजा और 20 हजार रुपये जुर्माना अदा करे। जुर्माना की राशि सेक्टर-26 के इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड में जमा कराए। यह निर्देश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम-2 चंडीगढ़ ने सुनवाई के बाद दिया है। शिकायतकर्ता पीपी सिंह निवासी सेक्टर-11 चंडीगढ़ ने नई दिल्ली स्थित रेलवे मंत्रालय और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन लिमिटेड, सेक्टर-34 चंडीगढ़ स्थित इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन लिमिटेड, अंबाला स्थित नार्दन रेलवे के डिविजनल रेलवे मैनेजर, चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर और नई दिल्ली स्थित डिप्टी ट्रेन सुपरिंटेंडेंट के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी।
शिकायतकर्ता पीपी सिंह ने उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में कहा कि 9 जून 2016 को नई दिल्ली से चंडीगढ़ के लिए शताब्दी एक्सपेस ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। शाम 7:15 बजे उसे नई दिल्ली से प्रस्थान का और रात 10 बजकर 45 मिनट पर चंडीगढ़ पहुंचने का समय था। उन्होंने ई- टिकट कराया था। इसमें कैटरिंग चार्ज भी शामिल था। पीपी सिंह ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि यात्रा के दौरान जो खाना परोसा गया उस खाने की पैकेट ढीला पैक किया हुआ था। दाल/ग्रेवी ट्रे में गिर रहे थे। खाना गीला और गंदा ट्रे के माध्यम से परोसा जा रहा था।
चावल-दाल में थे मरे हुए कीड़े
शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम को यह भी बताया कि पनीर की ग्रेवी के साथ पराठा खाने के साथ ही के दूसरे आइटम के लिड को खोला और देखकर हैरान रह गया कि दाल और चावल में मरे हुए कीड़े थे। इस संबंध में जब कैटरिंग स्टाफ को सूचना दी तो खाना का ट्रे बदल दिया और दूसरा खाना लेकर आया लेकिन शिकायतकर्ता ने उस खाना को अस्वीकार कर दिया और वे भूखे ही रह गए। इस संबंध में ट्रेन सुपरिंटेंडेंट के पास कंपलेंट बुक में शिकायत दर्ज की। रेलवे ने उपभोक्ता फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सेवा में कोताही नहीं की है। ट्रेन में खाना सही तरीके से परोसा जाता है।