प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों की शिकायतों पर जांच के लिए गठित कमेटी की जांच रिपोर्ट खारिज। शहर के प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों की शिकायतों पर जांच के लिए डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रूबिंदरजीत सिंह बराड़ द्वारा डिप्टी डायरेक्टर (वोकेशनल) स्कूल सरोज मित्तल की अध्यक्षता में गठित कमेटी की जांच रिपोर्ट सोमवार को खारिज कर दी है।
डायरेक्टर हायर एजुकेशन जितेंद्र यादव ने जांच कमेटी की रिपोर्ट को पूरी तरह खोखला करार दिया और कड़ी टिप्पणी करते हुए जांच रिपोर्ट नए सिरे से तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अमर उजाला ने 11 जून के अंक में सबसे पहले जांच कमेटी की रिपोर्ट में खामियों को ‘प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ जांच कमेटी की लीपापोती’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में पूरी तरह से प्राइवेट स्कूलों का बचाव किया गया है। रिपोर्ट में एक भी स्कूल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही या उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई थी।
उधर, जांच रिपोर्ट खारिज होने से शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले में चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के अभिभावकों ने उच्च अधिकारियों से मामले की जांच करने की मांग की है।
40 दिन में जांच कमेटी का नतीजा जीरो
शहर के प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस, प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस में लगवाने, कैंपस में ड्रेस और किताबें महंगी बेचने के मामले में डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ने दो जून को पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी ने 3-4 बार समय निर्धारित होने के बावजूद रिपोर्ट 10 जून को जमा कराई। जांच कमेटी ने 32 स्कूलों के खिलाफ करीब 100 शिकायतों पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया। किसी भी अभिभावक या स्कूल से कोई जवाब तलब नहीं हुआ। दफ्तर में बैठकर ही पांच सदस्यों की कमेटी ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर डाली।
मामले में जांच कमेटी के सदस्यों को कड़ी फटकार लगाई गई है
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26 के बाद ही होगी कार्रवाई
प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ शिकायतों के पूरे मामले को डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रूबिंदरजीत सिंह बराड़ देख रहे हैं। इन दिनों बराड़ अमेरिका दौरे पर हैं। 26 जून के बाद उनकी वापसी होगी। सूत्रों के अनुसार डायरेक्टर हायर एजुकेशन द्वारा नए सिरे से जांच रिपोर्ट तैयार करने के आदेशों से अब मामला लटक सकता है। छुट्टी से लौटने के बाद बराड़ ही मामले को देखेंगे। सोमवार को जितेंद्र यादव ने पूरे मामले को लेकर शिक्षा सचिव से भी बातचीत की। सूत्रों के अनुसार, मामले में जांच कमेटी के सदस्यों को कड़ी फटकार लगाई गई है।
जांच रिपोर्ट की खामियां
1. समीक्षा रिपोर्ट के तौर पर किया गया तैयार।
2. 32 में से एक भी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई के बारे में नहीं कहा गया।
3. स्कूल के खिलाफ शिकायतों की ग्राउंड लेवल पर जाकर जांच नहीं की गई।
4. जांच रिपोर्ट में सिर्फ सुझाव दिए गए।
5. रिपोर्ट तैयार करते समय अभिभावकों से बातचीत नहीं की गई।
6. रिपोर्ट में कमेटी द्वारा कड़ी कार्रवाई करने के बारे में कमेंट नहीं किया गया।
7. प्राइवेट स्कूलों की बजाय विभाग को ही किताबों की मोनोपॉली रोकने के लिए बुकशॉप खोलने का सुझाव दिया गया।
जितेंद्र यादव, डायरेक्टर, हायर एजुकेशन यूटी ने बताया कि मैंने जांच रिपोर्ट कमेटी को वापस भेज दी है। रिपोर्ट में किसी भी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने या मामले में दोषी पाए जाने जैसी कोई भी बात नहीं है। रिपोर्ट पूरी तरह से निम्न स्तर की है। कमेटी को दोबारा से फैक्ट के आधार पर रिपोर्ट देने को कहा गया है। नई रिपोर्ट के लिए अभी समय निर्धारित नहीं किया है।
नितिन गोयल, प्रेसिडेंट, चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने बताया कि 40 दिन लगाकर भी जांच कमेटी ने रिपोर्ट के नाम पर दिखावा किया है। ऐसी रिपोर्ट तो कोई क्लर्क 3-4 घंटे में तैयार कर दे। यह पूरी तरह से शहर के अभिभावकों के साथ धोखा हुआ है। ऐसी रिपोर्ट से प्रशासन के अधिकारियों पर सवाल उठता है। शिकायत में दोषी पाए जाने वाले स्कूलों पर साफ-साफ कार्रवाई की जानी चाहिए।