पलभर के गुस्से में किए एक अपराध मात्र से कैदी बुरे नहीं हो जाते। कैदियों में मासूम दिल के साथ कला भी छुपी होती है। ऐसा मानना है चंडीगढ़ से ग्राफिक प्रिंटिंग एवं डिजिटल/मैनुअल प्रिंटिंग में एमएफए की पढ़ाई करने बुड़ैल जेल में आर्ट टीचर दीपक चौहान का।
हुनर के पारखी ये कैदी अपने हाथों से बनाई मिठाइयों से ट्राइसिटी के लोगों का दिल जीत चुके हैं। त्यौहारों पर यहां की बनी मिठाइयों की धूम रहती है। दीपक लगभग 10 महीने में बुड़ैल जेल के कुछ कैदियों की कला को समझ उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं। कैदियों के इसी आर्ट वर्क को सेक्टर-10 में गवर्नमेंट म्यूजियम की आर्ट गैलरी में पेश किया गया है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने शुक्रवार इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस दौरान वह कैदियों की कलाकारी को देख हैरान हो गए और उनकी कला की तारीफ की। इस मौके पर एआईजी जेल डॉ. पालिका अरोड़ा भी मौजूद रहीं।
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दीपक चौहान ने बताया कि यहां पर कैदियों की पिछले वर्ष दिसंबर से लेकर अगस्त तक के आर्ट वर्क को प्रदर्शित किया गया है। यह प्रदर्शनी 8 सितंबर तक सुबह 10 से शाम 5 बजे तक यह प्रदर्शनी खुली रहेगी। वहीं कैदियों के आर्ट वर्क को प्रदर्शनी में वाजिब दाम पर बेचे जाने पर भी विचार चल रहा है।
पहले दिन कई कलाप्रेमी यहां पहुंचे और कैदियों की कला को सराहा। दीपक ने बताया कि यहां कुल 27 कैदियों का आर्ट वर्क रखा गया है। यहां पर कैनवस पर अक्रेलिक पेंटिंग, टू-डी और थ्री-डी पेंटिंग, पेपर मैशिंग और पीओपी से तैयार आर्ट वर्क, हाई-रीलिफ स्क्लपचर्स, पैनल पेंटिंग, ट्राइपॉड लैंप, टेबल लैंप आदि भी रखे गए हैं। इनमें वेस्ट वुड और फ्रेश वुड का भी इस्तेमाल किया गया है। वहीं, पॉट पेंटिंग भी पेश की गई है। इनके अलावा फर्नीचर फैक्ट्री में तैयार स्टडी टेबल, कुर्सियां आदि भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं। जानकारी के मुताबिक यह पहली बार है जब बुड़ैल जेल के कैदियों की इस प्रकार की प्रदर्शनी लगी है, जिन कैदियों ने यह आर्ट वर्क पेश किया है।
जेल से छूटने के बाद कैदियों को मिलेगा कमाई का जरिया
दीपक ने बताया कि कैदियों को यह आर्ट वर्क सिखाने का मकसद एक प्रकार से उन्हें तकनीकी शिक्षा देना है ताकि वह जेल से छूटकर आर्ट वर्क से भी अपनी आजीविका कमा सकें। यहां कुल 150 के लगभग पेंटिंग, स्क्लपचर्स, के अलावा लैंप आदि वर्क रखा गया है। इसके अलावा गार्डन डेकोरेशन के लिए यहां पर बतख परिवार भी प्रदर्शनी में है। प्रदर्शनी में एक नाइजीरियन कैदी द्वारा चिड़िया पर बैठी एक देवी का आर्ट वर्क भी है। यहां पर पेपर मैश आदि से आर्टिफिशियल फ्रूट की टोकरी भी प्रदर्शनी में है। दीपक चौहान ने बताया कि स्कूलों में थ्रीडी पेंटिंग के लिए इसे स्कूलों में भी भेजने का प्रयास चल रहा है। जानकारी के मुताबिक जेल में एक फाइन आर्ट स्टूडियो बनाने पर भी विचार चल रहा है। इसमें एक प्रिंटिंग सेक्शन भी होगा जिसमें स्क्रीन प्रिंटिंग, विजिटिंग कार्ड प्रिंटिंग आदि समेत टाई एंड डाई, ब्लॉक प्रिंटिंग भी शामिल होगा।