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नया संकट: अब ब्लैक फंगल का इंजेक्शन बाजार से गायब, दवा विक्रेता बोले-स्टॉक ही नहीं मंगाते 

Tue, 18 May 2021 10:43 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 

सार

स्थिति यह है कि पीजीआई में भर्ती मरीजों के परिजन इंजेक्शन की तलाश में अलग-अलग बाजारों में दवा के लिए चक्कर लगा रहे हैं, बावजूद उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। 
 
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black fungus - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ में कोरोना के मरीजों के इलाज में रेमेडेसिविर और टोसिलिजुमैब इंजेक्शन के बाद अब ब्लैक फंगल के एम्फोटेरिसिन-बी  इंजेक्शन की किल्लत हो गई है। सूत्रों का कहना है कि अचानक से बढ़ी मांग के कारण मार्केट में इसकी कमी हो गई है।
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दवा विक्रेताओं की मानें तो इससे पहले कभी इस इंजेक्शन की इतनी डिमांड ही नहीं हुई। इसलिए ज्यादातर स्टॉकिस्ट एम्फोटेरिसिन-बी का स्टॉक ही नहीं मंगाते हैं। ऐसे में अचानक से मांग बढ़ने के कारण इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसकी किल्लत को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इसे भी मरीजों को मुहैया कराने का निर्णय लिया है। इसे लेकर निदेशक स्वास्थ्य के निर्देश में कार्य योजना बनाई जा रही है।

22 हजार में खरीदे दो इंजेक्शन

बीकानेर (राजस्थान) निवासी 75 साल के एक मरीज को कोविड-19 ठीक हो जाने के 15 दिन बाद पीजीआई में भर्ती किया गया। वह भी ब्लैक फंगल का शिकार है। मरीज के परिजन राकेश ने बताया कि शुरू के दो एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन उसने सेक्टर-11 से 22 हजार रुपये में खरीदा था, लेकिन तीसरा इंजेक्शन उसे नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए उसने शहर के अलग-अलग दवा मार्केट की प्रत्येक दवा की दुकान का चक्कर लगा लिया है। 

केस- 2
ठीक यही स्थिति पीजीआई में भर्ती हरियाणा के एक मरीज की है। उसके परिजनों ने भी 12500 रुपये चुकाकर एक इंजेक्शन खरीदा था, लेकिन अब वे भी इंजेक्शन के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं। शहर के किसी भी मेडिकल की दुकान पर उन्हें यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा। 

पीजीआई में अब तक 32 मरीज हुए भर्ती
पीजीआई से कोविड-19 अस्पताल में इसके 17 मरीज भर्ती हैं। वहीं पिछले एक महीने के दौरान इसके 15 मरीजों की ईएनटी विभाग के अंतर्गत सर्जरी की जा चुकी है। सभी मरीज चंडीगढ़ के बाहर के हैं। वही, जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच- 16 में अब तक इसका एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है।

अचानक से बढ़ी मांग से हुई किल्लत
चंडीगढ़ केमिस्ट एसोसिएशन के महासचिव विनय जैन ने बताया कि कोविड से पहले इस इंजेक्शन की कोई डिमांड नहीं थी। शहर के 95 प्रतिशत केमिस्ट शॉप वाले इसे नहीं मंगाते थे। लेकिन ब्लैक फंगल के कारण अचानक से इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। इस कारण शहर में इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही।
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ये है उपचार

मधुमेह का उचित नियंत्रण।
इलेक्ट्रोलाइट के बिगड़ने व रीनल फंक्शन टेस्ट और लिवर फंक्शन टेस्ट।
डेड टिश्यू को प्रारंभिक अवस्था में निकालना।
फंगल कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट।
मास्क पहनना, चेहरे में किसी तरह का बदलाव होने पर तत्काल डॉक्टर की राय लें। 

इन रोगियों में अधिक आशंका
कोविड के रोगी
मधुमेह के साथ कोविड रोगी जो स्टेरॉयड तथा टोक्लीजुमाव या अन्य इम्यूनोस्पसेट प्रयोग कर रहे हैं और उनका ब्लड शुगर नियंत्रण में नहीं है।
जिन कोविड रोगियों का अंग प्रत्यारोपण हो चुका है।

ये हैं लक्षण
चेहरे पर भरापन, चेहरे पर दर्द, माथे में दर्द, आंख का लालीपन, सूजन और आंख के चारों तरफ भरापन। नाक में पपड़ी जमना और खून मिला स्राव निकलना। नाक बंद होना। आंखों में सूजन, पलकों पर सूजन, आंखों की रोशनी जाना, एक के दो दिखना, आंखों का चलाने में दिक्कत, तालू का रंग बदलना, दांतों का ढीला होना, चेहरे और नाक का रंग बदलना, आंखों के पीछे दर्द का होना। इन सभी में से कोई भी लक्षण होने पर रोगी को नाक, कान, गला विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। 

देश में इससे पहले भी इस मर्ज के काफी मरीज थे, लेकिन कोविड-19 से उनकी संख्या लगभग ढाई गुना ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में मरीजों को बेहद सचेत रहने की जरूरत है। चेहरे के किसी भी भाग में कोई भी परिवर्तन होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है। क्योंकि इसमें जितनी जल्दी बीमारी का पता चल जाता है उतना ही अच्छा इलाज संभव हो पाता है।  -प्रो. अरुणालोक चक्रवर्ती, विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी पीजीआई

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