हुड्डा शासन के दौरान साल 2009 में विधानसभा भंग करने से ठीक दो दिन पहले रोहतक में अलॉट हुए 222 औद्योगिक प्लॉटों की जांच के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन आईएएस अफसरों की कमेटी गठित की है।
सरकार की ओर से सुझाए गए नामों में से अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन, प्रमुख सचिव डाक्टर महावीर सिंह व अतिरिक्त निदेशक उद्योग अश्विनी कुमार की कमेटी गठित कर दी गई है।
कमेटी आवंटन के लाभार्थियों समेत अलॉटमेंट के साक्षात्कार के लिए बुलाए गए सभी आवेदकों की जांच करेगी। इसी आधार पर हाईकोर्ट तय करेगा कि किसके अलॉटमेंट रद होंगे और किसे प्लॉट दिया जाना है। यदि सही आवेदकों की संख्या प्लॉटों से अधिक हुई तो ड्रा निकलेगा।
प्लॉट्स की बिक्री और निर्माण पर रोक
अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने इन प्लॉटों की बिक्री और खाली पड़े प्लॉटों में निर्माण पर रोक लगा दी है। हालांकि हाईकोर्ट की ओर से कारोबार जारी रखने और निर्माणाधीन प्लॉटों पर निर्माण अपने रिस्क पर करने की छूट दी गई है।
अलॉटमेंट में मुख्यमंत्री, उनके सांसद पुत्र व स्थानीय कांग्रेसी विधायकों के नजदीकियों को बगैर प्रक्रिया अपनाए प्लॉट देने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
याचिकाओं में कहा गया था कि अनेक ऐसे आवंटी हैं, जो इसके लिए अयोग्य हैं। अलॉटमेंट कमेटी ने विज्ञापन में रखी गई शर्तों की अनदेखी कर हुड्डा के करीबियों को प्लॉट अलॉट कर दिए।
आरोप लगाया गया था कि अलॉटमेंट का परिणाम काफी समय तक रोके रखा गया, लेकिन चुनाव से ठीक पहले आनन-फानन में अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी कर दी गई, ताकि चुनाव में राजनीतिक लाभ मिल सके।
मौजूदा प्लॉट आवंटन में मिलीं कमियां
जस्टिस हेमंत गुप्ता पर आधारित डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पांच फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को मामले में अंतरिम आदेश आया। अपने आदेश में बेंच ने कहा है कि एचएसआईडीसी ने माना है कि अलाटमेंट में खुदमुख्तारी हुई।
कोयला खदान आवंटन केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट की बेंच ने कहा है कि मौजूदा मामले में अलाटमेंट के दौरान कमियां मिली हैं। लिहाजा इसकी परख के लिए आईएएस अधिकारियों की कमेटी गठित होनी चाहिए।