रोजगार की चाहत में लाखों रुपये खर्च कर अफगानिस्तान गए भारतीय युवकों को ट्रेनिंग देकर तालिबान से लड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है।
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अमेरिका बेस्ड कंपनी में रोजगार दिलवाने के नाम पर इन युवकों को ले जा कर एक-47 की ट्रेनिंग के बाद तेल कंपनी की सुरक्षा के लिए बतौर सिक्योरिटी गार्ड ड्यूटी लगाई जाती है।
इतना ही नहीं, जिस कंपनी में युवकों को काम दिया गया था, उस कंपनी की पूर्व सैनिक होने की शर्त के चलते फर्जी भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कागजात भी तैयार किए जा रहे हैं।
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इस पूरे कार्य में एजेंटों के साथ मिलकर भारतीय पूर्व सैनिक पाक नागरिक के साथ मिलकर षड़ंयत्र रच रहा है। यह खुलासा कैथल सहित आसपास के जिलों से रोजगार की चाहत में अफगान गए युवकों ने किया।
जो ड्यूटी से इंकार करने पर विभिन्न यातनाएं सहने के बाद भारत पहुंचे हैं। पीड़ित युवकों ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत दी है।
प्रदेश के कई जिलों के युवा हैं वहां
जिले के गांव सिसला निवासी रामचंद्र, अंबाला के लाल माजरी निवासी बीरबल, यमुनानगर के सादिकपुरा निवासी सुरेश कुमार, यमुनानगर के मुसींबल निवासी नरेश कुमार, इसी गांव के दिनेश कुमार, यमुनानगर के खानपुर गांव निवासी कृष्ण कुमार ने इस बारे में जानकारी दी है।
इन युवकों ने बताया कि यमुनानगर के धनौरी, अंबाला के गदौली एवं यमूनानगर के टोडरपुर निवासी एजेंटों ने उनसे दो से तीन लाख रुपये तक की राशि लेकर अफगानिस्तान में अमेरिकी बेस्ड कंपनी में काम दिलवाने का आश्वासन दिया था। उन सभी ने अगस्त सितंबर 2013 में एजेंटों को राशि सौंप दी।
इसके बाद ये उन सभी को कुछ दिनों के बाद काबुल ले गए। जहां उन्हें एक महीना दस दिनों तक भारतीय सेना के पूर्व जवान बताने वाले हिमाचल प्रदेश के किशोरी लाल एवं पाक नागरिक अब्दुल ने जबरदस्ती एक-47 चलाने की ट्रेनिंग दी।
इसके बाद काबुल के पास ही बोस्टन में स्थित एक तेल कंपनी की सुरक्षा में तैनात कर दिया। जहां उन्हें एक-एक एक-47, 100 राउंड कारतूस, मैग्जीन, बॉडी आर्मर, रेडियो सेट दिया गया तथा कहा गया कि तालिबान से कंपनी की सुरक्षा करनी है।
अमेरिकी नहीं, अफगानी कंपनी ने दी नौकरी
इन युवकों ने बताया कि जिस कंपनी के माध्यम से उन्हें नौकरी दी गई, वह अमेरिका की न होकर अफगानिस्तान की ही थी तथा उस कंपनी में नौकरी के लिए सेवानिवृत्त जवान होना अनिवार्य था।
जिसके लिए किशोरी लाल ने उन सभी के भारतीय सेना के जे एंड के राइफ्ल्स जबलपुर मध्य प्रदेश के सेवानिवृत्ति की पासबुक बनाकर दी गई। जो भारत से ही छप कर वहां पहुंची थीं। इन युवकों ने खुलासा किया कि भारतीय सेना का पूर्व सैनिक किशोरी लाल ही ये फर्जी कागजात तैयार करवाता है।
इंकार करने पर दुबई के रास्ते भारत भेजा ड्यूटी के दौरान खतरे के चलते जब उन्होंने काम करने से इंकार किया तो उन्हें काम कर रहे अंग्रेजों ने जान से मारने की धमकी दी तथा सिर्फ एक दिन खाना दिया। लेकिन उन्होंने काम करने से इंकार कर दिया।
जिस पर कंपनी के अधिकारियों ने करीब 10-12 लड़कों को दुबई के रास्ते भारत भेज दिया। रामचंद्र ने बताया कि वह गत फरवरी में भारत पहुंचा। उसने पुलिस को शिकायत दी है।
प्रदेश के कई युवा अभी भी फंसे हैं वहां
इन युवकों ने खुलासा किया कि यहां से रोजगार दिलवाने की चाहत में भारतीय युवकों को अफगानिस्तान ले जाया जा रहा है। जहां उन्हें जबरन तालिबान का मुकाबला करवाया जाता है। जो युवक धमकी से डर गए, वे वहीं फंसे हुए हैं तथा डर के चलते तालिबान का मुकाबला करने को मजबूर हैं।
छह माह में मात्र 70 हजार रुपये दिए रामचंद्र ने कहा कि नौकरी के नाम पर उन्हें 50 हजार रुपये प्रति माह देने के लिए कहा गया था लेकिन छह माह में उसे केवल 70 हजार रुपये दिए गए। वे अब इन एजेंटों एवं अफगानिस्तान में भारतीय युवकों का शोषण कर रहे पूर्व सैनिक सहित अन्य के खिलाफ कार्रवाई करवाना चाहते हैं।
एसपी कुलदीप सिंह यादव ने कहा कि मामले की जांच सीआईए को सौंपी गई है। वहीं, सीआईए इंचार्ज सब इंस्पेक्टर सत्यवान सिंह ने कहा कि एसपी के निर्देशानुसार शिकायत पर जांच की जा रही है। जो भी दोषी होगा, उसे गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस तथ्यों की पड़ताल कर रही है।