फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा-हिमाचल और उत्तराखंड में कभी भी तबाही मचा सकता है भूकंप, रिसर्च में बड़ा खुलासा

Tue, 27 Nov 2018 02:54 PM IST
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
भूकंप
विज्ञापन

देश भर के चार वैज्ञानिकों की रिसर्च में खुलासा हुआ है कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भविष्य में कभी भी भूकंप आ सकता है और बड़ी तबाही मच सकती है। वैज्ञानिकों को इन प्रदेशों में नई फॉल्ट लाइनें मिली हैं जो अब तक धरती के गर्भ में ही थीं। वैज्ञानिकों की इस टीम ने भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजी है कि भविष्य में फाल्ट लाइन वाले इलाकों में कोई बड़ा प्रोजेक्ट न लगाया जाए। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेज की ओर से वर्ष 2016 में देश के चार बड़े संस्थानों को एक प्रोजेक्ट दिया गया।

विज्ञापन


इसके तहत यह पता लगाना था कि भविष्य में किन क्षेत्रों में भूकंप आने की आशंका ज्यादा है। उसके बाद आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर जावेद मलिक और पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो. महेश ठाकुर ने प्रोजेक्ट शुरू कर दिया। इनका साथ आईएसआर गांधीनगर (गुजरात) व एलडी इंजीनियरिंग कालेज अहमदाबाद के वैज्ञानिकों ने दिया। इस टीम ने प्रथम चरण में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में रिसर्च किया। इस टीम ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार के जरिए इन प्रदेशों में जगह-जगह जाकर जमीन के दस मीटर भीतर तक के हिस्से का एक्स-रे किया।

साथ ही स्मार्ट स्टेशन मशीन के जरिए मैपिंग की। साथ ही सेटेलाइट से इन प्रदेशों का डाटा भी जुटाया। दो साल के इस रिसर्च से पता चला है कि हिमाचल प्रदेश के कालाआम के पास नहान में एक फॉल्ट लाइन मिली है। इसी प्रदेश के सिरमौर, उत्तराखंड में ऋषिकेश और हरियाणा के यमुनानगर में भी फॉल्ट लाइनें मिली हैं। फॉल्ट लाइन का कारण वैज्ञानिकों ने बताया कि यहां धरती के दस मीटर नीचे जमीन के हिस्से ऊपर-नीचे मिले हैं। इससे धरती का संतुलन बिगड़ गया है। फॉल्ट लाइन वाले क्षेत्र में कभी भविष्य में भूकंप का केंद्र भी हो सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

तीनों प्रदेशों में भूस्खलन की स्थिति भी भयावह

इसी रिसर्च टीम ने भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी लार्ज स्केल मैपिंग ऑफ भूस्खलन पर भी काम किया है। इस टीम ने 43 प्वाइंट देखे। उसके बाद निर्णय दिया कि 22 प्वाइंट पर खतरा है। यहां भूस्खलन नहीं रुकने वाला है। वहां से आबादी को दूर रखा जाए, यही बेहतर है। यह स्थान उत्तराखंड के अलकनंदा नदी के पास एनएच-58 कलियासोर मंदिर के पास है। यहां 150 साल से भूस्खलन हो रहा है। टीम ने सरकार को सुझाव दिया है कि यहां केवल पुल बनाकर ही रास्ता डायवर्ट किया जाए या बाईपास बनाया जाए।

यहां भूस्खलन रुकने वाला नहीं है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि यहां पूर्व में फाल्ट लाइन मिलने के कारण भूकंप आया था और उसके कारण मिट्टी, पत्थर चूरा बन गया, जो भूस्खलन का रूप ले गया। इसी तरह हरियाणा के उमरी गांव के पास मोरनी हिल में 2011 से भूस्खलन तेज हो गया। आसपास के घरों में भी दरारें आ गई हैं। यहां भी फॉल्ट लाइन है। उधर, हिमाचल प्रदेश के शिमला के पास ढल्ली टनल का भूस्खलन भी नहीं रुक सकता। यहां भी बड़ा खतरा है। जनता को दूर रखने की सलाह दी है।

चार संस्थानों के वैज्ञानिकों ने इन प्रदेशों में जाकर फॉल्ट लाइनें खोजी हैं। इसी लाइन के कारण भविष्य में यहां कभी भी भूकंप आ सकता है। साथ ही भूस्खलन भी कई जगह रुकने वाले नहीं हैं। उसका कारण भी फॉल्ट लाइनों का मिलना है। इसकी रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी है।
- डॉ. महेश ठाकुर, भूगर्भ विज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें