इराक में फंसे पंजाब के 53 युवकों समेत 165 भारतीयों की घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निर्देश पर इराक में भारतीय दूतावास के अधिकारी हरकत में आए और उन्होंने बुधवार को कंस्ट्रक्शन कंपनी पहुंच कर विवाद सुलझा लिया।
वर्करों के टिकट का खर्च भारत सरकार उठाएगी। दस फरवरी तक वर्करों के भारत लौटने की उम्मीद है। इराक में बसरा स्पोर्ट्स सिटी स्थित अल जबूरी कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम कर रहे 165 भारतीयों को करीब एक साल से वेतन नहीं दिया जा रहा था। कंपनी मालिक अब्दुल्ला जबूरी न तो उनके पासपोर्ट दे रहा था, न ही उन्हें कैंपस से बाहर जाने की इजाजत थी।
एक हफ्ते पहले कंपनी ने उन्हें खाना देना भी बंद कर दिया था। ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और अब बंधकों के घर लौटने की आस जगी है। इराक में फंसे अंबाला के गांव जटवाड निवासी इकबाल सिंह ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि सोमवार को उनकी भारतीय दूतावास के अधिकारियों से बात हुई थी।
अधिकारियों का कहना था कि अगर बिना पैसे के जाना चाहते हो तो एक हफ्ते में भिजवा देंगे। पैसे लेने हैं तो इंतजार करना होगा। तीन फरवरी तक तीन माह का वेतन मिलने की बात कही जा रही है। इसके सात दिन बाद वर्कर भारत लौट आएंगे। समझौते के बाद कंपनी ने वर्करों को खाना देना शुरू कर दिया है।