इंडो पाक बॉर्डर पर हाईअलर्ट के चलते लोगों ने छोड़ा गांव
- फोटो : अमर उजाला
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सीमावर्ती गांवों में लोग मरने-मारने को तैयार हैं, वहीं बहुत से लोगों ने 29 सिंतबर की रात युद्ध के साये में गुजारी। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़े तनाव के बाद 29 सितंबर की रात को सीमावर्ती गांवों के अधिकतर लोग अपना सामान निकालने में लगे रहे, जबकि साधन संपन्न वाले लोग अभी स्थिति का इंतजार कर रहे हैं।
गांव चूहड़ीवाला धन्ना का राहत शिविर शरणार्थियों से भरा हुआ है, वहीं गांव आमलगढ़ का राहत शिविर अब तक खाली पड़ा है। सीमा से सटे गांव रूपनगर के सरपंच महेंद्र कुमार ने बताया कि बीती रात गांव के लोग सामान निकालते रहे। करीब 70 प्रतिशत गांव खाली हो चुका है जबकि कुछ लोग अभी अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
खुद के साधन वाले लोगों ने सामान बांध लिया है लेकिन अभी तक घरों से नहीं निकले। इसके अलावा गांव के करीब 10 प्रतिशत किसान गांव छोड़ने को राजी नहीं हैं। उनका कहना है कि वे खुद सेना के साथ मरने-मारने को तैयार हैं।
किसानों को 6 महीने की कमाई नष्ट होने का डर
इंडो पाक बॉर्डर पर हाईअलर्ट के चलते लोगों ने छोड़ा गांव
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सरपंच ने बताया कि इस समय नरमा और धान की फसल पक कर तैयार खड़ी है। पिछले 6 माह की किसानों की कमाई नष्ट हो रही है। ऐसे में किसानों का कहना है कि जब फसल नष्ट हो जाएगी तो खुद जिंदा रहकर करना भी क्या है। रात भर सीमा सुरक्षा बल के जवानों की गाड़ियां गांव में गश्त करती रहीं।
इधर सरहदी गांव कोयलखेड़ा, बकैनवाला, रूपनगर और बारेकां के लिए सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल चूहड़ीवाला धन्ना में बनाए गए राहत शिविर में बड़ी संख्या में शरणार्थी पहुंच चुके हैं। गांव डंगरखेड़ा में शुक्रवार को अमावस्या पर लगे मासिक मेले से बड़ी तादाद में लंगर सामग्री तैयार करके चूहड़ीवाला धन्ना भेजी गई है। आसपास गांवों के आरएमपी डाक्टर शरणार्थियों की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
वहीं गांव मौजगढ़, दौतलपुरा तथा आलमगढ़ में बनाए गए राहत शिविरों में शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक कोई शरणार्थी नहीं आया। इन शिविरों के इंचार्ज तहसीलदार जसपाल सिंह बराड़ के अनुसार गांव दीवानखेड़ा से कुछ घर खाली हुए हैं जो अपने रिश्तेदारियों में चले गए जबकि अन्य गांवों में लोग घर खाली करने को तैयार नहीं है।