दुश्मन से देश की सरहदों को महफूज रखने वाली सेना अपने एक और सामाजिक दायित्व को भी बखूबी निभा रही है। ये दायित्व है समाज के उन विशेष बच्चों के प्रति जो स्पेशल केयर के अभाव में न केवल दुत्कार दिए जाते हैं, बल्कि हीन भावना का भी शिकार हो जाते हैं।
सेना इन बच्चों को अब सामाजिक मोर्चे पर लड़ना सिखाएगी, ताकि समाज में इन बच्चों की अब अनदेखी न हो सके। इसके लिए वेस्टर्न कमांड के अधीनस्थ पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और जम्मू कश्मीर में आठ आशा स्कूल सेंटर भी चल रहे हैं। इनमें चंडीमंदिर, अमृतसर, जालंधर, पठानकोट, जम्मू, अंबाला कैंट, फिरोजपुर व एक अन्य शामिल है।
तीन सौ बच्चाें को ट्रेंड कर रही वेस्टर्न कमांड
इसका संचालन सेना के आला अफसरों की पत्नियों का संगठन ‘आर्मी वाइफ्स वेलफेयर एसोसिएशन’ की ओर से किया जा रहा है। वेस्टर्न कमांड के अंतर्गत सेना इन आठों केंद्रों में करीबन तीन सौ से अधिक विशेषज्ञ बच्चों को ट्रेंड कर रही है। इनमें 80 फीसदी बच्चे तो सेना जवानों व अफसरों के दाखिल किए जाते हैं और बीस फीसदी सिविलयन लिए जाते हैं। विशेष बच्चों को यहां 18 साल की उम्र तक रखा जाता है और इस दौरान उसे विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग दी जाएगी।
विशेषज्ञ निखारेंगे विशेष बच्चों की स्किल्स
विशेषज्ञ व प्रिंसिपल ममता रानी ने बताया कि इन बच्चों को एक खास मिशन के तहत इस कदर ट्रेंड किया जा रहा है ताकि ये बच्चे समाज में नार्मल बच्चों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें। उन्होंने बताया कि इसके लिए कई तरह के चरण निर्धारित किए गए हैं, जिसके तहत प्री-प्राइमरी सेक्शन से लेकर विभिन्न स्किल्स में बच्चों को ट्रेंड किया जाएगा।