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पंजाब में शार्ट सर्किट से जल गईं 56 लाख की फसलें, मुआवजा नहीं हुआ जारी

Thu, 18 May 2017 09:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
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गेहूं की फसल में आग - फोटो : file photo
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पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (पावरकाम) के हर साल करोड़ों रुपये खर्च करके बिजली सप्लाई सिस्टम में सुधार करने का दावा करता है। लेकिन विभाग की ओर से किए जा रहे यह दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल गेहूं सीजन में बिजली की तारों में शार्ट सर्किट होने से पंजाब भर में फसलों को आग लगने के लगभग दो सौ मामले रिपोर्ट हुए हैं, इनमें लाखों की फसलें स्वाह हो गई हैं। पीड़ित किसानों को पावरकॉम ने अभी तक मुआवजा भी नहीं दिया है। 
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पावरकाम हर साल 200 से 250 करोड़ रुपये खर्च करके पंजाब भर में बिजली के आवंटन सिस्टम में सुधार के दावे करता है। इसके तहत बिजली की ढीली तारों को ठीक करने, जहां ट्रांसफार्मर या फीडर ओवर लोड हैं, वहां नया ज्यादा पावर का ट्रांसफार्मर लगाने की बात कही जाती है। इसके बावजूद भी हर साल गेहूं की फसलों में बिजली की तारों में शार्ट सर्किट के कारण आग लगने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 
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फसलों में बिजली की तारों में शाटसर्किट के कारण आग

आग से राख हुई फसल - फोटो : file photo
इस साल भी पंजाब में गेहूं की फसलों में बिजली की तारों में शाटसर्किट के कारण आग लगने के 199 मामले रिपोर्ट हुए और जांच के बाद 103 मामले सही पाए गए हैं।  इन 103 केसों में 700 एकड़ रकबे पर गेहूं की फसलें जली हैं और किसानों का 56 लाख का नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि सरकार की ओर से शार्ट सर्किट से जली फसलों का मुआवजा किसानों को प्रति एकड़ 8000 रुपये के हिसाब से दिया जाता है।  

इस बारे में डायरेक्टर डिस्ट्रिब्युशन केएल शर्मा ने बताया कि जैसे ही पावरकाम को सूचना मिलती है कि बिजली की तारों में शार्ट सर्किट कारण आग लगी है, तुरंत नजदीक के एसडीओ या जेई को मौका मुआयना करने के लिए भेजा जाता है। उसके बाद 24 घंटे के अंदर-अंदर फसल मुआवजा कमेटी भी मौके पर जाती है और देखती है कि क्या असलियत में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट ही है या कोई और कारण है। इस कमेटी की ओर से की गई जांच में ही रिपोर्ट हुए 199 में से 103 केस ही सही पाए गए हैं। इन 103 केसों में 56 लाख का मुआवजा बनता है। संबंधित अधिकारियों को 31 मई तक सभी केसों का निपटारा करने के आदेश दे दिए गए हैं।   
 
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