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बड़े दलों को आंखें दिखाएंगे निर्दलीय

Wed, 10 Sep 2014 02:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए सियासी समर छिड़ चुका है। सभी सियासी दल हार जीत की गुणा-गणित में लगे हैं। किसी ने अपने प्रत्याशी घोषित कर प्रचार अभियान शुरू कर दिया है तो कोई प्रत्याशियों की घोषणा के लिए मंथन कर रहा है।
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इस चुनाव में मैदान में उतर रहे छोटे-छोटे दल जहां कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों को परेशान कर रहे हैं वहीं निर्दलीयों ने भी इन्हें सोचने को मजबूर कर रखा है।

अकसर सरकार बनाने में बैसाखी बनने वाले यह निर्दलीय इस बार भी मैदान में पूरे जोर शोर से उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
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इस बार भी अहम भूमिका निभाएंगे निर्दलीय

पिछली बार जहां कांग्रेस सरकार निर्दलीयों की बैसाखी पर बनी थी उसी तरह यह निर्दलीय विधायक इस बार भी अपनी भूमिका कुछ इसी तरह की बनाना चाहते हैं। यह किसी भी तरह सत्ता की चाभी अपने हाथ में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके लिए वह राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस और भाजपा का विरोध कर जनता के बीच में वोट मांगने के लिए पहुंच गए हैं। लोगों से बड़े-बड़े वादे और अन्य पार्टियों से ज्यादा विकास कराने का दावा इनका मूल मंत्र है।

इन्हीं दावों के साथ पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य भर में सात निर्दलीय विधायकों ने जीत हासिल की थी और दस विधानसभा सीटों पर यह रनर-अप रहे थे। इसके बाद इनमें से कुछ ने कांग्रेस को समर्थन देकर सरकार बनवाई थी।

सात सीटों पर था दमदार प्रदर्शन

विधानसभा चुनाव 2009 में निर्दलीयों ने राज्य की सात विधानसभा सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी। इनमें फतेहाबाद में प्रह्लाद सिंह ने 48637 वोट पाकर कांग्रेस के दुड़ा राम को पराजित किया था, सिरसा में गोपाल कांडा ने 38147 वोट पाकर इनेलो के पदम चांद को पटकनी दी, पुंडरी में सुल्तान ने 38929 मत पाकर कांग्रेस के दिनेश कौशिक को मात दी वहीं पानीपत ग्रामीण में ओमप्रकाश जैन ने 23770 वोट पाकर इनेलो के विमल कादियान को मात दी, गुड़गांव में सुखबीर ने 41013 वोट पाकर कांग्रेस के धरमवीर को हराया था।

फरीदाबाद एनआईटी में पंडित शिवचरन ने 23641 वोट पाकर कांग्रेस के  ए. चांद चौधरी को पराजित किया वहीं हथीन में जलेब खान ने 33774 मत पाकर कांग्रेस के हर्ष कुमार को पराजित किया। इस बार भी यह प्रत्याशी किसी भी तरह जीत हासिल कर बड़े दलों को आइना दिखाना चाहते हैं।
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निर्दलीयों के सहारे रही वर्तमान सरकार

वर्ष 2009 में 22 अक्तूबर का जारी हुए चुनाव परिणाम में कांग्रेस को 40 सीटें मिली थीं और विपक्षी पार्टी इनेलो को 31 सीटें मिली थीं। इसके बाद जोड़-तोड़ की राजनीति से कांग्रेस ने निर्दलीयों का सहारा लेकर सरकार बनाई। कुछ दिन बाद निर्दली विधायकों से अनबन होने पर हजकां के पांच विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

इसको लेकर कुलदीप बिश्नोई ने दल बदल कानून के तहत उन पांच विधायकों की सदस्यता रद करने की मांग की थी, जिसकी सुनवाई आज भी चल रही है। इस प्रकार पूरे पांच साल सरकार निर्दलीयों की बैसाखी पर ही टिकी रही।
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