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Independence Day: 74वें स्वतंत्रता दिवस पर छलका आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सेनानियों के परिवारों का दर्द

Sat, 15 Aug 2020 06:58 AM IST
खुशबू गोयल नीरज कुमार, चंडीगढ़
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भारत को आजादी दिलाने में स्वतंत्रता सेनानियों का अहम योगदान रहा। चंडीगढ़ में भी कई स्वतंत्रता सेनानियों का परिवार मौजूद है। हालांकि समय के साथ उनकी अनदेखी भी हुई है। स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस पर चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी एक रस्म अदायगी के तौर पर आते हैं, बाकी दिन उनकी सुनवाई नहीं होती। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर चंडीगढ़ में रह रहे दो स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों से अमर उजाला ने बात की।
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स्वतंत्रता आंदोलन में पिताजी नौकरी छोड़ तीन बार जेल गए, आज नहीं हो रही कोई सुनवाई

केके शारदा के पिता एमके शारदा स्वतंत्रता सेनानी थे। साल 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान वह तीन बार जेल में रहे और कई दिनों तक उन्हें प्रताड़ना झेलनी पड़ी। स्वतंत्रता आंदोलन में कूदने से पहले वह पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत थे। अच्छी खासी नौकरी चल रही थी लेकिन महात्मा गांधी के आह्वान पर नौकरी छोड़ आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए।

वह मियांवाली, सरगोधा (अब पाकिस्तान में) और जालंधर जेल में रहे। महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में मैला भी उठाया। उनके साथ उनकी पत्नी विभा शारदा भी आंदोलन से जुड़ गईं थीं। एमके शारदा की मृत्यु साल 2009 में हुई थी। सेक्टर-43 के स्वतंत्रता सेनानी कांप्लेक्स में रहने वाले केके शारदा ने बताया कि उनके पिता का इतना सम्मान था कि जो भी पंजाब के गवर्नर बनते थे, वह उनके घर जरूर आते थे।

आखिरी बार जनरल एसएफ रोड्रिग्स उनके घर आए थे। उसके बाद से कोई भी गवर्नर या अधिकारी नहीं आए। अब तो चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी भी हालचाल पूछने नहीं आते। कोई सुनवाई नहीं होती। सिर्फ स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस पर अधिकारी आते हैं और मिलकर चले जाते हैं। अस्पतालों में घंटाें लाइन में खड़ा होना पड़ता है। इस बारे में चंडीगढ़ प्रशासन से मांग भी की, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। स्वतंत्रता सेनानी परिवार के बच्चों को सरकारी नौकरी में कम से कम दो फीसदी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन वह भी नहीं है।
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एक नज्म गाने पर अंग्रेजों ने डाल दिया था जेल में

फूंक दो बर्बाद कर दो आशियां अंग्रेजी की... इस नज्म से अंग्रेज इतना डर गए थे कि उन्होंने इसे गुनगुनाने वाले 16 साल के युवक को जेल में डाल दिया। इस युवक का नाम वेद प्रकाश मेहरा था। देशभक्ति उनके खून में थी। उनके पिता व मां भी स्वतंत्रता सेनानी थे। जब वह पांच वर्ष के थे तब भी उन्हें अपने माता-पिता के साथ जेल में रहना पड़ा था।

यह कहना है स्व. वेद प्रकाश मेहरा की पत्नी बिमला देवी का। 79 वर्षीय बिमला देवी ने बताया कि उनकी सास सुख देवी व ससुर राम दत्ता भी स्वतंत्रता सेनानी थे। सेक्टर 43 फ्रीडम फाइटर कांप्लेक्स में रहने वालीं बिमला देवी ने बताया कि अब न तो चंडीगढ़ प्रशासन सुध लेता है और न ही युवा पीढ़ी।

पंजाब के तत्कालीन गवर्नर व चंडीगढ़ के प्रशासक एसएफ रोड्रिग्स एक बार उनके घर पर मिलने आए थे। बीमार होने की वजह से उन्होंने डाक्टरी सहायता की मांग की थी। उस वक्त रोड्रिग्स साहब ने आश्वासन दिया था कि उनकी बातों पर गौर करेेंगे और कोई रास्ता भी निकालेंगे। समय बीतने पर सारे आश्वासन हवा हो गए।

उनका कहना है कि कम से कम डाक्टरी सेवा मिल जाए तो बहुत है। वह अपने बेटे और बहू के साथ सेक्टर 43 के स्वतंत्रता सेनानी कांप्लेक्स में रहती हैं। उम्र के इस पड़ाव में विस्तर पर हैं। उनकी बधु शम्मी मेहरा, सुनीता रानी, बेटा कृष्ण कुमार और पोती प्रतिभा ने कहा कि सिर्फ स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी आते हैं, बाकी दिनों उनकी कोई पूछ नहीं होती।

उनकी मांग है कि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों की देखभाल सरकार करे। उनके बच्चों को कम से कम दो प्रतिशत आरक्षण दे ताकि रोजगार मिल सके। साथ ही डाक्टर समय समय पर देख सके।
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