हरियाणा समेत सात राज्य ऐसे हैं, जहां खेती व अन्य कार्यों के लिए भूजल का दोहन सबसे ज्यादा किया जा रहा है। इन राज्यों में भूजल तेजी से नीचे जा रहा है। जबकि अत्यधिक भूजल दोहन के कारण पंजाब के 105 और हरियाणा के 36 ब्लॉक डार्क जोन में आ चुके हैं। जिसे लेकर केंद्र व राज्य सरकार चिंतित हैं।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान में भूजल दोहन से हालत गंभीर हो चुकी है। यहां करीब 78 जिलों के 193 ब्लॉकों ऐसे हैं, जहां भूजल दोहन की स्थिति ज्यादा खराब है। देश में भूजल दोहन के कुल क्षेत्र का 25 फीसदी एरिया सिर्फ इन राज्यों से आता है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने इस स्थिति से सभी राज्यों को अवगत करवाया है। केंद्र की सूचना के बाद हरियाणा सरकार भी गंभीर हो गई है।
भूजल दोहन
भूजल दोहन
- फोटो : Demo Photo
उधर, केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के संयुक्त सचिव अखिल कुमार ने बताया कि सरकार भू-जल के अत्यधिक दोहन को कम करने के लिए प्लानिंग कर रही है। इसके लिए सरकार अटल भू-जल योजना लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार वर्ल्ड बैंक से भी 6 हजार करोड़ की मदद लेगी। अगले दो से तीन महीने में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। इसे 2022-23 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत इन सभी राज्यों में वर्तमान में जल संचयन की चल रही सभी योजनाओं को भी इसी प्रोजेक्ट का ही हिस्सा बना दिया जाएगा।
भूजल दोहन
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पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान में स्थिति गंभीर
रिपोर्ट के अनुसार देश में 6548 भूजल ब्लाकों में से 1034 ब्लॉक में भूजल दोहन सबसे ज्यादा किया गया है। इनमें से 934 ब्लॉक ऐसे है, जिनकी स्थिति ज्यादा खराब है। ये ब्लॉक पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, तेलंगाना, आंधप्रदेश व तमिलनाडु में है। डार्क जोन में 36 ब्लॉक हरियाणा, 105 ब्लॉक पंजाब, 15 ब्लॉक दिल्ली और 164 ब्लॉक राजस्थान में हैं। इन इलाकों में भूजल दोहन अधिक है, लेकिन ग्राउंड वॉटर रीचार्ज के प्रयासों की रफ्तार बहुत धीमी है।
भूजल दोहन
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हरियाणा के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ के अनुसार हरियाणा के कुछ ब्लाक अत्यधिक भूजल दोहन की वजह से डार्क जोन में है, इसलिए इन इलाकों में सिंचाई के तरीकों को बदलने पर जोर दिया जा रहा है।
ये होंगे प्रयास
इन राज्यों में जलाशयों को संरक्षित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
- भूजल प्रबंधन का कार्य करने वाले संगठनों व संस्थाओं को सशक्त बनाया जाएगा।
- ग्राम पंचायतों को भी अपने गांव के जलाशयों को संरक्षित करने के लिए बजट उपलब्ध करवाया जाएगा।
- इस प्रोेजेक्ट में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएगी।