संस्थान जता चुका 11.5 करोड़ टन उत्पादन की उम्मीद
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल इस बार देश में गेहूं के रिकॉर्ड 11.5 करोड़ टन गेहूं के उत्पादन की संभावना जता चुका है। जो पिछले साल से तकरीबन सात फीसदी ज्यादा होगा। इसके पीछे संस्थान का तर्क है कि इस बार बिजाई का रकबा अधिक है, साथ ही अब तक मौसम ठीक रहने से फसल अच्छी तैयार हुई है। तीसरा नई वैरायटी डीबीडब्ल्यू 187 की अधिक बिजाई हुई, जिसका उत्पादन अन्य वैरायटी से ज्यादा है।
फसल पर ट्रैक्टर चलाना भी प्रभावित कर सकता है लक्ष्य
तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा गेहूं की तैयार फसल पर ट्रैक्टर चलाना भी उत्पादन के लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है। विरोध स्वरूप हरियाणा के कई जिलों में किसान रोजाना फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर रहे हैं। इससे न केवल किसान का खुद का नुकसान है, बल्कि यह देश के भंडार में हरियाणा के लक्ष्य को कम कर सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील है कि वे फसल को नष्ट न करें।
बढ़ता तापमान फसल के लिए ठीक नहीं : डॉ. बुंदेला
पिछले एक सप्ताह से अचानक से न्यूनतम तापमान 4 से 5 डिग्री तक बढ़ रहा है, जो गेहूं के लिए ठीक नहीं है। दूसरा यह स्थिर नहीं है, बल्कि लगातार बढ़ रहा है। अभी दस दिन तक तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर ये लंबा चला तो फसल पर जरूर असर पड़ सकता है। इस बार जल्दी गर्मी आने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ है। इसी के कारण दिक्कतें पैदा हो रही हैं। -डा. देवेंद्र बुंदेला, मौसम वैज्ञानिक, सीएसएसआरआई।