फरीदकोट हिंसा के विरोध में पंजाब बंद रहा। कहीं पर सिखों में काफी रोष देखने को मिला तो कहीं पर मिला जुला असर। इस दौरान कई बड़ी घटनाएं भी हुईं, जो बेहद चौंकाने वाली थीं। गांव बहिबल कलां में बंद के कारण मरे दो लोगों के अंतिम संस्कार नहीं हो सके। ऐसे में आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक मृतकों के परिजन विदेश में रहते हैं, इसलिए संस्कार नहीं हो सका।
बहिबल कलां मामले में प्रदर्शनकारी नामजद
पुलिस ने गांव बहिबल कलां में विरोध के मामले में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ पुलिस पर पथराव किया बल्कि वाहनों में आग लगा दी। बता दें कि इसी घटनाक्रम में पुलिस ने फायरिंग की थी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी।
25 लाख के मुआवजे की मांग
ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के प्रधान करनैल सिंह पीर मुहम्मद ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति से मारे गए लोगों के परिवारों के लिए 25-25 लाख और घायलों को 5-5 लाख देने की मांग की है। उन्होंने घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग की है।
नंदगढ़ ने नोची सिख नेता की दाढ़ी
तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ बठिंडा-अमृतसर हाईवे पर सिख संगतों के धरने के पास से गुजरे। इस पर वहां मौजूद सिख नेता परमिंदर सिंह बालियांवाली ने उन्हें धरने में साथ देने को कहा।
इस पर जत्थेदार ने कहा कि वह इस धरने से सहमत नहीं हैं। इसके बाद दोनों नेताओं में बहस हो गई। इसी दौरान नंदगढ़ ने बालियांवाली की दाढ़ी नोच दी।
सिख युवकों ने नंदगढ़ पर तेजधार हथियारों से हमला करने की भी कोशिश की लेकिन वहां मौजूद डीएसपी जनक सिंह ने नंदगढ़ को तुरंत वहां से निकाल लिया।
चार अकाली नेताओं, दो एसजीपीसी सदस्यों का इस्तीफा
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से नाराज चार शहरी अकाली नेताओं ने पार्टी पदों से इस्तीफे देने की घोषणा कर दी है। वहीं, रामपुराफूल में एसजीपीसी की महिला सदस्य जसपाल कौर और गिद्दड़बाहा में एसजीपीसी के पूर्व सीनियर उपाध्यक्ष और कमेटी सदस्य जत्थेदार गुरपाल सिंह गोरा ने भी पद से इस्तीफे का एलान किया है।
वीरवार को सिख संगठनों की बंद की कॉल पर कपूरथला और रेल कोच फैक्टरी के पास कपूरथला-सुल्तानपुर लोधी रोड पर तीन घंटे जाम लगाया। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना के लिए केंद्र और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
शिअद के उपप्रधान गुरप्रीत सिंह बंटी वालिया, सीनियर उपप्रधान ठेकेदार सुरिंदर सिंह, उपप्रधान हरप्रीत सिंह रॉनी और अकाली नेता दविंदर सिंह ने अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए कहा कि सियासी ओहदे मानवता से ऊपर नहीं हैं।
डिप्टी सीएम को भी रोकने की कोशिश, रास्ता बदला
पंजाब बंद का जालंधर में मिलाजुला असर रहा। सिख जत्थेबंदियों ने कई स्थानों पर प्रदर्शन कर यातायात प्रभावित किया। उन्होंने आधे घंटे तक रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन किया, वहीं ढाई घंटे तक नेशनल हाईवे स्थित पीएपी चौक पर भी नारेबाजी की। इस दौरान डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल को अपना रास्ता बदलना पड़ा।
साथ ही दिल्ली लाहौर बस सदा ए सरहद का रूट डायवर्ट किया गया। कई स्थानों पर सिख जत्थेबंदियों ने जबरन दुकानों को बंद करवाया। डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के काफिले को पीएपी मैदान के दूसरे दरवाजे से निकाला गया। सुखबीर बादल शहर में अपने निजी दौरे पर आए थे। इस दौरान सिख जत्थेबंदियों ने डिप्टी सीएम को भी रोकने की कोशिश की।
पीएपी चौक पर जाम लगने से अमृतसर और पठानकोट का यातायात ढाई घंटे के लिए बुरी तरह से प्रभावित हो गया। सिख जत्थेबंदियों के एक गुट ने अमृतसर-दिल्ली ट्रैक पर बैठकर जाप करना शुरू कर दिया। एडीसीपी सिटी जे इलेनचेलियन, एडीसीपी ट्रैफिक परमिंदर भंडाल ने मौके पर पहुंच करीब आधे घंटे के बाद लोगों को वहां से उठाया।
जिप्सी और मोटरसाइकिलों पर सिख जत्थेबंदियां शहर के फगवाड़ा गेट, भगत सिंह चौक, सेंट्रल टाउन, रैनक बाजार, शेखां बाजार, मिलाप चौक, मॉडल टाउन, हरबंस नगर, जेपी नगर, आदर्श नगर के साथ लगते इलाकों में घूमती रही।
मोगा में सरकारी, गैर सरकारी बसों का चक्का जाम
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ मोगा बाजार बंद रहा। बाघपुराना, निहाल सिंह वाला और धर्मकोट समेत जिले के सभी कस्बे बंद रहे। सिख जत्थेबंदियों ने जिले के मुख्य चौक और रास्तों, लिंक सड़कों पर ट्रैफिक जाम कर दिया। बंद के दौरान सरकारी, गैर सरकारी बसों का चक्का जाम रहा। कई सरकारी स्कूल भी बंद रहे।
विभिन्न सिख संगठनों के नेता वीरवार सुबह गुरुद्वारा बीबी काहन कौर में इकट्ठा हुए। उन्होंने शहर में रोष मार्च कर मुख्य चौक में धरना दिया। सिख जत्थेबंदियों के नुमाइंदों ने मुख्य चौक पर लगे फिल्म एमएसजी-2 के पोस्टर भी उतारे।
इस घटना के जिम्मेदार शरारती तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते मोगा-लुधियाना मार्ग स्थित कस्बा अजीतवाल में गांवों ढुडीके, चूहड़चक, दौधर, किल्ही चाहला, कोकरी कलां, नत्थूवाला और झंडेआना की सिख संगतों ने ट्रैफिक रोका।
धर्मकोट सब डिवीजन के अंतर्गत कस्बा किशनपुरा कलां में भी मुख्य मार्ग पर सिख संगत ने चक्का जाम किया। मोगा-कोटकपूरा रोड, बाघापुराना, रोडे़ कॉलेज और बाघापुराना-मुद्दकी रोड स्थित गांव नत्थूवाला गर्बी और बाघापुराना-भगता मार्ग स्थित गांव कोटला रायेका में भी ट्रैफिक जाम किया। मोगा-बरनाला रोड स्थित गांव हिंमतपुरा पुल पर भी चक्का जाम रखा।
फरीदकोट हिंसा के विरोध में था बंद का आह्वान
गौरतलब है कि गांव बरगाड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और फरीदकोट में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में दो युवकों की मौत के विरोध में पंजाब बंद का आह्वान किया गया था। इस बंद के कारण प्रदेश में जीवन अस्त-व्यस्त रहा। बाजार से लेकर स्कूल तक बंद रहे।
सिख संगठनों ने कई जगह रोष प्रदर्शन किए और नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। कई शहरों में पेड़ गिराकर मार्ग बंद किए गए। बवाल के मद्देनजर बठिंडा को वीरवार सुबह से ही पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। इस दौरान सभी सरकारी और गैर सरकारी शिक्षक संस्थाएं बंद रहीं। बसें भी नहीं चलीं।
सिख संगठनों ने बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे 64 पर पेड़ फेंक कर जाम कर दिया। मोगा का बाजार पूरी तरह बंद रहा। इसके अलावा बाघापुराना, निहाल सिंह वाला और धर्मकोट समेत जिले के सभी कस्बों में भी सन्नाटा पसरा रहा। सिख जत्थेबंदियों ने जिले के मुख्य चौक और लिंक सड़कों पर ट्रैफिक जाम कर दिया।
बंद के दौरान सरकारी और गैर सरकारी बसों का चक्का जाम रहा। एहतियातन कई स्कूल भी बंद कर दिए गए। हालांकि अमृतसर में पंजाब बंद को ज्यादा समर्थन नहीं मिला। कुछ समय के लिए श्री हरमंदिर साहिब के आसपास की दुकानें बंद हुई लेकिन बाद में खुल गईं।
वहीं, दमदमी टकसाल के प्रमुख हरनाम सिंह धुंमा, भाई जसवीर सिंह रोडे, भाई मोहकम सिंह, जसकरन सिंह काहन सिंह वाला (शिरोमणि अकाली दल अमृतसर), करनैल सिंह पीर मुहम्मद और प्रमुख सिख हस्तियों ने अलग-अलग जिलों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि सिखों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया है।
विभिन्न सिख संगठनों ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की तरफ से न्यायिक आयोग की स्थापना और एसआईटी से मामले की जांच कराने के फैसले को नामंजूर कर दिया। उन्होंने एलान किया कि जब तक गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के लिए जिम्मेदार आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।