गर्मी की छुट्टियों में कुछ करना चाहते हैं तो चपलता और सतर्कता का ये खेल सीखिए। आप इसमें कैरियर बनाकर नाम भी कमा सकते हैं। जूडो एक ऐसा खेल है जिसमें खिलाड़ियों को हर दम अलर्ट रहना पड़ता है। आंखें झपकी नही कि सामने वाला खिलाड़ी आपको पटकनी देकर चारों खाने चित कर सकता हैं।
सिटी के युवा टेनिस को अपने कॅरियर की तरह भी चुन सकते हैं। यहां जूडो के लिए सबसे बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है। चंडीगढ़ स्पोर्ट्स कांप्लेक्स-42 में इस खेल का सबसे बड़ा हब हैं। यहां पर रोज 60 से अधिक लड़के और लड़कियां अभ्यास करती हैं। वहीं सिटी के कई स्कूलों में भी इसके लिए खेल सेंटर बनाए गए है।
मैट पर खेला जाता है यह खेल
समय के साथ जूडो के खेल में कई तकनीकी बदलाव आए हैं। खेल सेंटराें पर इसके लिए अलग से काफी बड़ा मैट के साथ गद्दे पर खेला जाता है। यह ओलंपिक गेम है और इसे ज्यादातर इंडोर खेला जाता हैं।
यह हैं नियम
जूडो में एकल वर्ग और वेट कैटगरी के हिसाब से मुकाबले खेले जाते हैं। सब जूनियर वर्ग में मुकाबले का समय 3 मिनट का होता हैं। जूनियर वर्ग में मुकाबले का समय 4 मिनट का रहता है। सीनियर वर्ग में मुकाबला 5 मिनट का रहाता हैं। मुकाबले में अधिक अंक बटोरने वाले खिलाड़ी को विजेता घोषित किया जाता हैं।
महत्वपूर्ण खेल सेंटर
जूडो का मेन सेंटर स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के सेक्टर 42 के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में हैं। इस सेंटर से बबीता नेगी, पूजा, जसविंदर जैसे इंटरनेशनल खिलाड़ी उभरे हैं। इसके अलावा इसे स्कूलों में खेला जाता है। इनमें देव समाज स्कूल 21, गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल सेक्टर 34, अजीत कर्म सिंह इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल 41, मोती राम स्कूल 27, शारदा सर्वहितकारी स्कूल सेक्टर 40 शामिल हैं।
फीस स्ट्रक्चर
सेक्टर- 42 के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में स्टूडेंट के लिए फीस 300 और नॉन स्टूडेंट के लिए पूरे साल भर की फीस ली जाती हैं। वहीं सरकारी स्कूलाें में इसे निशुल्क ही खिलाया जाता हैं।
जूडो एकाग्रता का खेल है, इसे खेलने वाले को हमेशा सतर्क रहना पड़ता है।
- कृष्ण लाल, जूडो कोच