-एकल बेंच केे संदर्भ पर खंडपीठ ने दिया स्पष्टीकरण, कानूनी स्थिति स्पष्ट की
-प्रयोगशाला में भारी सामग्री का परिवहन और भंडारण करना होगा अव्यावहारिक
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट एकल बेंच की ओर से भेजे गए संदर्भ पर कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब्त नशीली गोलियों का पूरा स्टॉक परीक्षण के लिए भेजना आवश्यक नहीं है। केवल इसमें से कुछ नमूनों को भेजना ही पर्याप्त है।
एकल जज ने मामले को कानूनी स्थिति पर स्पष्टीकरण के लिए मुख्य न्यायाधीश को भेजा था। मुख्य न्यायाधीश ने इसके उत्तर की जिम्मेदारी खंडपीठ को सौंपी थी। प्रश्न था कि क्या क्या संपूर्ण सामग्री परीक्षण के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब भेजी जानी है या प्रत्येक शीशी या टैबलेट की पट्टी से नमूना को भेजा जाना है। हाईकोर्ट ने कहा कि कि पूरी सामग्री भेजने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्रयोगशाला में भारी सामग्री का परिवहन और भंडारण करना अव्यावहारिक होगा। इसके बजाय, रासायनिक परीक्षण के लिए नमूनों को मिश्रित कर लिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत बरामद सामग्री में से नमूने लेते हुए मजिस्ट्रेट की उपस्थिति अनिवार्य है। पुलिस विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि मालखानों में पर्याप्त भंडारण सुविधाएं हों। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों पर यह दायित्व है कि वे नमूनों को संबंधित प्रयोगशालाओं में तुरंत भेजें, ताकि उसमें संलग्न सामग्री की जांच हो सके।
इसमें वित्त मंत्रालय के स्थायी आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि रासायनिक परीक्षण के लिए प्रत्येक नमूने में ली जाने वाली मात्रा सभी मादक दवाओं के संबंध में पांच ग्राम से कम नहीं होगी, सिवाय अफीम, गांजा और चरस के मामलों में जहां रासायनिक परीक्षण के लिए प्रत्येक मामले में 24 ग्राम की मात्रा की आवश्यकता होती है।