ड्रंकन ड्राइव सोसाइटी के लिए खतरा बन चुकी है। आए दिन शराब पीकर वाहन चलाने वालों के कारण सड़क हादसे होते रहते हैं। कई लोगों की जान ऐसे जा चुकी है। ऐसे में शराब पीकर वाहन चलाने वाले मामलों में पकड़े गए चालकों को सजा अन्य के लिए सबक होनी चाहिए। खासकर उनके लिए जो मामूली सी सजा या जुर्माना भरकर छूट जाते हैं।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) एसके सचदेवा ने यह टिपप्णी डंकन ड्राइव के मामले में सीजेएम कोर्ट से 3 महीने की सजा, 6 महीने तक लाइसेंस सस्पेंड और 3 हजार रुपये जुर्माने के फैसले के खिलाफ दायर एक अपील पर की। अपील में सीजेएम कोर्ट से सुनाई गई सजा को माफ करने की अपील की गई थी।
अदालत ने अपील को खारिज करते हुए कहा कि दोषी की सजा माफ करने का कोई आधार नजर नहीं आता। ऐसे मामलों में 6 महीने तक ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसला उचित है। अदालत ने जुर्माना भी सही लगाया है। हालांकि अदालत ने 3 महीने की सजा को 1 महीने में तब्दील कर दिया है।
अदालत ने यह सजा मोहाली फेज-9 के राजेश्वर को सुनाई है। उसे सीजेएम कोर्ट ने ड्रंकन ड्राइव मामले में 3 महीने कै द की सजा सुनाई थी। ऊपरी अदालत ने मामले में जुर्माने और लाइसेंस सस्पेंड करने के आदेश को बरकरार रखा है।
मोहाली फेज-9 के राजेश्वर ने सीजेएम कोर्ट की ओर से 7 दिसंबर 2015 को सुनाए गए एक फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर की थी। सीजेएम कोर्ट ने उसे मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत दोषी पाया था। अपील में राजेश्वर की ओर से उनके वकील ने कहा था कि निचली अदालत ने फैसला सुनाते समय कुछ तथ्यों पर गौर नहीं किया।
साथ ही कहा गया कि एक्ट के तहत जितनी न्यूनतम मात्रा का चालान है, उससे कम पी हुई थी। राजेश्वर को झूठा फंसाने के लिए एल्कोहल की मात्रा गलत लिखी गई। कोर्ट ने कहा कि राजेश्वर की यह दलीलें आधारहीन हैं, क्योंकि वह ट्रायल कोर्ट में अपना दोष मान चुका था। इससे पहले वाले चालान में भी राजेश्वर ने अपना दोष माना था।