आपका अंगदान किसी दूसरे को जिंदगी दे सकता है। पीजीआई में आर्गन डोनेशन पर आयोजित पब्लिक फोरम के दौरान डा. आरके धीमान, डा. ए दुसेजा, डा. एस जैन ने आर्गन डोनेशन के बारे में जानकारी दी।
डा. एस जैन ने कहा कि ब्रेनडेड बाडी के लक्षण अलग होते हैं। ब्रेनडेड बाडी के अंगों का पूरी तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्रेन डेड बाडी में ब्रेन के सेल डेड हो जाते हैं, उसकी रिकवरी किसी तरह से नहीं होती।
इसीलिए बाडी को मेडिकल डेड घोषित कर दिया जाता है। यह अवस्था कोमा से अलग है। पीजीआई में अब तक पांच हजार ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि डिमांड ज्यादा है और अंगदान करने वाले कम।
अंगों को रखते हैं खास लिक्विड में
अंगों को संरक्षित रखने में भारी खर्च होता है। हरेक अंग को संरक्षित करने का अलग तरीका होता है। संरक्षित करने के लिए लिक्विड इस्तेमाल किया जाता है।
सेशन के दौरान हुए सवाल जवाब
सवाल- हम अंगदान करते हैं। हमको कभी अंग की आवश्यकता होगी तो मिलेगा क्या?
जवाब- उपलब्धता होगी तो मिलेगा। क्रिटिकल पोजीशन होने और उपलब्धता मायने रखती है। इसमें फर्स्ट कम फर्स्ट जैसी कोई बात नहीं?
सवाल- यह आर्गन किस द्रव्य में रखे जाते हैं?
जवाब- यह अंग एक खास प्रकार के द्रव्य में रखे जाते हैं। हरेक अंग की एक सीमा होती है और हरेक अस्पताल को संरक्षित करने का अधिकार नहीं है?
सवाल- क्या कैंसर का पेशेंट अंगदान कर सकता है?
जवाब- हां, कैंसर और डायबिटीज के मरीज अंगदान कर सकते हैं।