रिहायशी आरक्षण के लिए पंजाब सरकार और इसके बोर्डों व निगमों के कर्मचारी, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कर्मचारी, पंजाब सरकार के सहकारिता विभाग के अधीन काम करती बड़ी संस्थाओं जैसे मार्कफेड, मिल्कफेड, पंजाब राज्य को-ऑपरेटिव बैंक, हाउसफेड आदि के अधिकारी-कर्मचारी और पंजाब सरकार द्वारा सहायता प्राप्त यूनिवर्सिटियों के कर्मचारी पात्र होंगे।
इस स्कीम के अधीन अप्लाई करने के लिए उम्मीदवार ने कम-से-कम पांच साल की रेगुलर सर्विस की हो या इस स्कीम के शुरू होने के पांच साल के अंदर कर्मचारी सेवा मुक्त हुआ हो।
जिनके पास पहले प्लॉट, उन्हें अलॉटमेंट नहीं
रिहायशी आरक्षण में अलॉटमेंट सिर्फ उन उम्मीदवारों को दिया जाएगा जिनका अपने नाम या पत्नी/पति या निर्भर व्यक्ति के नाम कोई फ्लैट/प्लॉट न हो। इसके साथ ही उम्मीदवार को ऐच्छिक कोटे या किसी स्कीम के अधीन प्राथमिकता के आधार पर कोई रिहायशी प्लॉट/घर अलॉट न किया हो। उम्मीदवार को विभाग के संबंधित डीडीओ द्वारा रेगुलर ज्वाइनिंग/सेवामुक्ति का तारीख संबंधी तसदीकशुदा आवेदन जमा करवाना होगा।
पंजाब ने प्राकृतिक गैस पर वैट 11 फीसदी घटाया
उद्योगों को पर्यावरण समर्थक गैसों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक अहम फैसला लेते हुए मंत्रीमंडल ने मंगलवार को राज्य में प्राकृतिक गैस पर वैट की दर 14.3 प्रतिशत से घटाकर 3.3 प्रतिशत करने का फैसला किया है। मंत्रीमंडल की मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि वैट घटाने से राज्य में औद्योगिक प्रदूषण को कम करने में सफलता मिलेगी।
पंजाब में इस समय पर प्राकृतिक गैस पर वैट की दर 13 प्रतिशत +10 प्रतिशत सरचार्ज है जो 14.30 प्रतिशत बनता है। नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटड (एनएफएल) गैस का बहुत उपभोग करता है, जिसके बठिंडा और नंगल में स्थित प्लांटों में इसका प्रयोग होता है। चुनिंदा उद्योगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर द्वारा बहुत कम मात्रा में प्राकृतिक गैस का उपभोग किया जाता है।
वैट बढ़ाने से घट गई थी राजस्व वसूली
उल्लेखनीय है कि मार्च, 2015 से पहले प्राकृतिक गैस पर वैट की दर 5.5 प्रतिशत+10 प्रतिशत सरचार्ज, कुल 6.05 प्रतिशत थी। मार्च, 2015 के बाद प्राकृतिक गैस पर वैट की दर 6.05 प्रतिशत से बढ़ाकर 14.3 प्रतिशत कर दी गई। वैट की दर में विस्तार होने से एनएफएल ने प्राकृतिक गैस की अंतरराज्यीय बिलिंग शुरू कर दी, जिससे प्राकृतिक गैस पर वैट से राजस्व घट गया।
साल 2014 -15 से लेकर 2018-19 के दौरान प्राकृतिक गैस पर वैट की वसूली 105.77 करोड़ रुपए से कम होकर 5.67 करोड़ रुपए रह गई थी, जो साल 2019-20 के वित्तीय वर्ष के दौरान और भी कम होकर जून, 2019 तक 1.84 करोड़ रुपए रह गई।
दरअसल, एनएफएल द्वारा गुजरात से हर महीने 300 करोड़ रुपए की प्राकृतिक गैस खरीदी जा रही है और 15 प्रतिशत की दर के हिसाब से केंद्रीय प्रांतीय टैक्स का 45 करोड़ रुपए उस राज्य को अदा किया जा रहा है। मंत्रीमंडल के मंगलवार के फैसले के बाद माना जा रहा है कि वैट की दर घटने से एनएफएल प्राकृतिक गैस की बिलिंग पंजाब से शुरू कर सकता है, जिससे प्राकृतिक गैस पर पंजाब की वैट वसूली बढ़ सकती है।