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अवैध निर्माणों से बदल गया चंडीगढ़ का नक्शा, मूकदर्शक बने रहे अधिकारी

Wed, 17 Feb 2021 04:57 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ का सारंगपुर रोड 2006 में और 2021 में - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ का नक्शा बदल रहा है। शहर के सारंगपुर रोड के दोनों तरफ अब टाइल्स और फर्नीचर के बड़े-बड़े शोरूम बन चुके हैं। आज से 15 साल पहले यहां एक भी दुकान नहीं थी। 2009 के बाद उस इलाके में कृषि भूमि पर निर्माण कार्य शुरू हुए और वर्ष 2014 के बाद पक्के शोरूम खड़े कर दिए गए। यह खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है। ऐसा नहीं है कि अफसर इससे अनजान थे, लेकिन सबकुछ देखते हुए भी मूकदर्शक बने रहे। 

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यूटी प्रशासन का शहरी नियोजन विभाग संबंधित अधिकारियों को अवैध निर्माण की जानकारी देता रहा लेकिन अफसर फाइलें दबा कर बैठ गए, जिसकी वजह से आज सिर्फ सारंगपुर ही नहीं पेरीफेरी के सभी इलाकों में अवैध निर्माण की भरमार है। यह सभी निर्माण चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के विपरीत हैं। ज्यादातर निर्माण गांव और अर्ध-शहरी इलाकों में हुए हैं, जिसकी वजह से खुड्डा अलीशेर, कैंबवाला, रायपुर कलां, दड़वा, खुड्डा लाहौरा, किशनगढ़, मनीमाजरा, मलोया आदि का क्षेत्रफल बढ़ गया है। भूमाफिया यहां तेजी से अवैध निर्माण कर रहे हैं। 


सूत्रों का यह भी कहना है कि जब से शहर में लाल डोरा बढ़ाने की चर्चाएं तेज हुई हैं, अवैध निर्माण की रफ्तार भी बढ़ गई है। इसकी भनक चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भी है। इस वजह से उन्होंने बीते शुक्रवार को शहरवासियों से आग्रह किया था कि लाल डोरे के बाहर के निर्माण को नियमित करने के लिए जब तक कोई नीति नहीं बन जाती, निर्माण कार्य न किया जाए। हालांकि उनके आग्रह का उल्टा असर हुआ है और लोगों ने निर्माण कार्य तेज कर दिया है। 

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शहरी नियोजन विभाग ने एमसी कमिश्नर-डीसी को पत्र लिख जताई चिंता
यूटी प्रशासन के शहरी नियोजन विभाग ने वर्ष 2019 में ही धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद भी समय-समय पर विभाग की तरफ से अवैध निर्माणों के सबूत तस्वीरों के साथ नगर निगम कमिश्नर, डीसी और एसडीएम के भेजे गए।

विभाग ने सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से भी स्थिति की गंभीरता समझाने का प्रयास किया, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। विभाग ने लिखित में कहा है कि शहर के पेरीफेरी इलाकों में तेजी से चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के विपरीत निर्माण किया जा रहा है। इन निर्माणों को रोका नहीं गया तो मास्टर प्लान के अनुसार इन इलाकों को विकसित करने के लिए जगह ही नहीं बचेगी।

गांवों के नगर निगम में शामिल होने के बाद से आई तेजी
नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 13 गांवों के नगर निगम में शामिल होने के बाद से अवैध निर्माण में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि इन इलाकों में ज्यादातर निर्माण किराए पर देने के लिए छोटे-छोटे मकानों के रूप में किए गए हैं। यह छोटे मकान सुरक्षा के मानकों को भी पूरा नहीं करते। कुछ इलाकों में छोटे-छोटे प्लॉट भी काटकर बेचे गए हैं।

लाभ कमाने के लिए खेती की जमीनों पर निर्माण कर रिहायशी मकान बना दिए गए हैं। शहर में किराए पर रहने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। मुख्य सेक्टरों में भी किराया काफी है। गांवों में आसानी से और सस्ते मकान किराए पर मिल जाते हैं इसलिए भूमाफिया यहां ज्यादा सक्रिय हैं। गौरतलब है कि 13 गांवों के नगर निगम में शामिल होने के बाद से यहां की जमीनों की कीमत कई गुना बढ़ गई है।
अब हर अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा
अब अगर कहीं भी अवैध निर्माण की सूचना मिलती है तो उसे तुरंत तोड़ दिया जाता है। लाल डोरे के बाहर हो रहे निर्माण पर पिछले दिनों यूटी प्रशासक ने भी शहरवासियों से आग्रह किया था कि लोग ऐसा न करें। पुराने निर्माणों को लेकर अध्ययन किया जा रहा है।  - मनोज परिदा, सलाहकार, यूटी प्रशासक
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