आईआईटी रोपड़ के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह उपकरण हमारे चेहरे की इंफ्रारेड तस्वीर लेता है। बिना किसी वायर की मदद से इसे जांच मशीन तक भेजा जाता है। यहां दो सेंकड के अंदर मशीन अपने नतीजे तक पहुंच जाती है। जिससे यह पता लग जाता है कि संबंधित व्यक्ति स्वस्थ्य है या फिर संदिग्ध।
खुद फैसला लेने में सक्षम
कोरोना के खिलाफ जंग में यह उपकरण एक अहम हथियार साबित हो सकता है। शोधकर्ता के मुताबिक इंफ्रारेड विजन सिस्टम कम लागत वाला एक छोटा उपकरण है और यह सुरक्षित तरीके से बिना किसी इंसानी दखल के फैसले ले सकता है। उपकरण 160x120 पिक्सल रेजोल्यूशन के साथ तापमान की माप करता है। इस उपकरण का वजन 400 ग्राम से भी कम है। प्रोफेसर रविबाबू ने बताया कि यह क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार है। इसके लिए आईआईटी रोपड़ ने उन्होंने चिकित्सा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों को आमंत्रित किया है।