रोजाना करोड़ों में कैश का ट्रांजेक्शन करने वाली कंपनियां भी कैश वैन में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह लागू नहीं कर सकी है।
सोमवार को 1.68 करोड़ की लूट में भी लुटेरों ने इन्हीं कमियों का फायदा उठाया और लूट के बाद गनमैन की बंदूकें भी लेकर फरार हो गए।
देश की अग्रणी कंपनी सीएमएस की कैश वैन में न तो जीपीएस लगा था और न ही कैमरा। लुटेरों को शायद इन खामियों की जानकारी थी और उन्होंने इनका पूरा फायदा उठाया।
वाहनों में आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने कुछ वर्ष पहले सभी कॉमर्शियल वाहनों में जीपीएस लगवाना अनिवार्य कर दिया था।
इसके बावजूद वित्तीय संस्थानों के लिए करोड़ों के कैश ट्रांसफर से जुड़ी कंपनियाें की तरफ से भी नियमों की अनदेखी की जा रही है।
सिर्फ कस्टोडियन को होती है तकनीकी जानकारी
सीएमएस कंपनी प्रबंधन के मुताबिक, चूंकि करोड़ों रुपये का लेनदेन होता है इसलिए सीएमएस की कैश वैन में कैश रखने और इसके अंदर सुरक्षा के लिहाज से कई इंतजाम होते हैं।
कस्टोडियन को भी रवाना करने से कुछ देर पहले इस बारे में जानकारी दी जाती है। अन्य कर्मियों को इसलिए जानकारी नहीं दी जाती है, क्योंकि रास्ते में उनकी वजह से भी कोई परेशानी हो सकती है।
लेकिन, वैन के अंदर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए न तो कोई कैमरा और न ही वाहनों में जीपीएस लगाए गए हैं।
लुटेरों ने इन्हीं कमियों का फायदा उठाया और एक करोड़ 68 लाख रुपये से भरा बॉक्स और दो असलहे लेकर फरार हो गए।
कैश वैन में हूटर लगाने के भी हैं निर्देश
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की ओर से प्रस्तावित गाइडलाइन्स के तहत किसी भी कैश वैन की मॉनिटरिंग के लिए इसमें जीपीएस होना चाहिए।
अगर जरूरत पड़े तो आकस्मिक स्थिति में इन्हें तत्काल रोका भी जा सकता है। इन वाहनों में हूटर भी लगाए जाने के दिशा-निर्देश हैं।