कोटकपूरा और बहिबल कलां गोलीकांड की जांच करने वाली एसआईटी के प्रमुख आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह अपना इस्तीफा नामंजूर होने के बाद भी अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से इस्तीफा खारिज किए जाने के बाद देर रात ट्वीट कर लिखा कि वे समाज की सेवा करते रहेंगे लेकिन एक आईपीएस अधिकारी के तौर पर नहीं।
उन्होंने ट्वीट किया- मैंने अपना काम किया ... मुझे कोई अफसोस नहीं है... मेरा सबसे आग्रह है कि इस मामले को महिमामंडित या राजनीतिककरण न करें... मेरे द्वारा दी गई रिपोर्ट और चार्जशीट का प्रत्येक वाक्य अपने आप में एक सुबूत है ... इसे किसी भी हालत में अनदेखा नहीं किया जा सकता ... कसूरवार व्यक्ति किसी भी हालत में सच के आईने का सामना करने की हिम्मत नहीं कर सकता .... मैंने अंतिम फैसले के लिए अपनी अपील श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की अदालत में दाखिल कर दी है, जो मेरी बुद्धि और कानून के ज्ञान के हिसाब से सबसे बड़ी अदालत है। मैं समाज की सर्वोत्तम तरीके से सेवा करना जारी रखूंगा लेकिन आईपीएस की तरह नहीं।
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उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कोटकपूरा गोलीकांड की एसआईटी रिपोर्ट को रद्द करते हुए पंजाब सरकार को नई एसआईटी का गठन करने और नई एसआईटी से कुंवर विजय प्रताप सिंह को अलग रखने के आदेश दिए थे। इस फैसले ने सीधे तौर पर कुंवर विजय प्रताप सिंह के कामकाज पर सवाल उठा दिए थे और पंजाब में विपक्षी दलों को कैप्टन सरकार पर निशाना साधने का मौका भी मिल गया था। हालांकि मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का एलान भी किया लेकिन मंगलवार को कुंवर विजय प्रताप ने मुख्यमंत्री को इस्तीफा सौंपते हुए समय पूर्व सेवानिवृत्ति का आग्रह किया था।
अपने त्यागपत्र में उन्होंने 22 साल के करिअर का उल्लेख किया और लिखा कि उन्होंने इस दौरान बहुत कुछ सीखा और वे आगे भी समाजसेवा से जुड़े रहेंगे। कुंवर विजय प्रताप ने 15 अप्रैल से सेवामुक्त करने का आग्रह किया था, जिसे मुख्यमंत्री ने नामंजूर करते हुए साफ कर दिया था कि उनके जैसे अफसरों की सेवाओं की पंजाब सरकार को जरूरत है। फिलहाल कुंवर विजय प्रताप के रुख से यह साफ नहीं है कि वे 15 अप्रैल के बाद क्या फैसला लेंगे।
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