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वैज्ञानिक व शोधकर्ता एकजुट हों, तो बढ़ेगी किसानों की आय : प्रो. राघवेंद्र

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चंडीगढ़। पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा (सीयूपीबी) के पर्यावरण विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। मुख्य वक्ता पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. एसएस मरवाहा रहे। उन्होंने पराली जलाने के नुकसान से लेकर आगे की प्रक्रियाओं के बारे में बताया। वहीं विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं को एकजुट होने के लिए कहा।
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मुख्य वक्ता प्रो. एसएस. मारवाहा ने धान की पराली को जलाने के प्रमुख कारणों को साझा किया। यह भी बताया कि खेतों में पराली को आग लगाना पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है, क्योंकि इससे वायु प्रदूषण का स्तर 3 से 5 गुना बढ़ जाता है जो कई स्वास्थ्य समस्याओं जैसे त्वचा और आंखों में जलन, फेफड़ों और हृदय रोग आदि का कारण बन जाता है। उन्होंने पराली के प्रबंधन के लिए विभिन्न समाधानों पर चर्चा की जिसमें हार्वेस्टर पर सुपर स्ट्रॉ प्रबंधन प्रणाली का उपयोग करना, बिजाई के लिए हैप्पी सीडर का उपयोग करना, माइक्रोबिअल कंसोर्टिया का उपयोग करके पराली को डीकम्पोस्ट करके मिट्टी में मिलाना, वैकल्पिक फसल प्रैक्टिस को अपनाना शामिल है। उन्होंने धान के अवशेषों के अन्य उपयोगों जैसे बायोमास टू एनर्जी, बायो सीएनजी, इथेनॉल उत्पादन, टेरिफिकेशन मशरूम उत्पादन आदि पर भी प्रकाश डाला।
पंजाब सरकार उठा रही है ये कदम
उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन की चुनौती से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को भी साझा किया और कहा कि पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी ने पंजाब के विभिन्न जिलों जैसे मुक्तसर, फाजिल्का, होशियारपुर, जालंधर, मानसा, मोगा, फरीदकोट, फिरोजपुर और अन्य जिलों में आसपास के किसानों के लिए बायोमास विद्युत परियोजनाएं शुरू की हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अन्य एजेंसियों के साथ दो से चार सप्ताह के भीतर धान के अवशेषों के आसान डीग्रेडेशन के लिए कुछ बैक्टीरियल इनोकुलमस के परीक्षणों का संचालन कर रहा है जो आने वाले समय में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध विकल्पों के बारे में समाज में जागरूकता फैलाने के लिए शिक्षाविदों से अपील की। डीन छात्र कल्याण प्रो. वीके गर्ग, डॉ. योगालक्ष्मी केएन ने भी विचार रखे और आभार जताया। पीयू के कई शिक्षकों ने भी इस वेबिनार में भाग लिया।
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