फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चे सिर्फ साइंस पढ़ेंगे तो दुनिया का पता नहीं लगेगा, हमें उन्हें मशीन नहीं इंसान बनाना है : निदेशक

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। अगर बच्चे सिर्फ साइंस पढ़ेंगे तो दुनिया का पता नहीं लगेगा, हमें उन्हें मशीन नहीं मानव बनाना है। यह कहना है इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च (आइसर) मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी का। संस्थान में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसर, सुविधाओं, शिक्षा व शोध को लेकर भविष्य के रोडमैप पर प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने अमर उजाला से खास बातचीत की। विज्ञान के अध्ययन और अनुसंधान के लिए देशभर में सात आइसर बने हैं, जिनमें से एक मोहाली के सेक्टर 81 में है। यहां 1700 विद्यार्थी बैचलर ऑफ साइंस, मास्टर ऑफ साइंस और 475 शोधार्थी पीएचडी कर रहे हैं। संस्थान में पर्यावरण, चिकित्सा और मेडिकल डिवाइस आदि को लेकर विभिन्न शोध किए जा रहे हैं। इनमें से एक प्रोजेक्ट मोहाली में हो रहे प्रदूषण और उसके कारकों को आंकने का भी शामिल है। उन्होंने बताया कि पंजाब में पराली जलाने व अन्य कारणों से मोहाली के पर्यावरण पर क्या असर पड़ रहा है और कितना प्रदूषण हो रहा है, इसका पल-पल का रिकॉर्ड आइसर रख रहा है।
विज्ञापन


सवाल : संस्थान में कितने रिसर्च प्रोजेक्ट चल रहे हैं, क्या कोई नया कोर्स भी शामिल किया गया है?
जवाब : तकनीक की नींव विज्ञान है और आइसर का उद्देश्य ऐसे इकोसिस्टम को विकसित करना है जहां क्यूरियोसिटी ड्रिवन साइंस हो। करीब 80 करोड़ के अनुदान से अभी 70-80 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। विद्यार्थी यहां बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री आदि बेसिक साइंस और मानविकी के विषय पढ़ते हैं और इनमें शोध करते हैं। संस्थान में बैचलर और मास्टर ऑफ साइंस इंटिग्रेटिड कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं और पीएचडी भी उपलब्ध है। अभी कोई नए कोर्स शामिल नहीं किए हैं। इसका निर्णय इस साल होने वाले परमॉर्फमेंस रिव्यू के बाद लिया जाएगा।

सवाल : संस्थान में किन नई चीजों पर शोध हो रहा है?
जवाब : वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग नई चीजें नहीं रह गई हैं लेकिन उसके आगे हम क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्वांटम मिशन पर काम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। हमारे पास इसमें काम करने के लिए मानव संसाधन और इन्फ्रास्ट्रक्चर दोनों उपलब्ध हैं। अभी इसमें अलग-अलग काम हो रहा है लेकिन कोई एक समेकित विभाग नहीं है। संस्थान में डाटा साइंस केंद्र बनाने का प्लान है। इसके अलावा वैज्ञानिक पर्यावरण विज्ञान, चिकित्सा, मानविकी आदि पर शोध किए जा रहे हैं। पर्यावरण विज्ञान में कैंपस द्वारा मोहाली में प्रदूषण का पल-पल का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। पंजाब में पराली जलाने और अन्य घटकों से कितना प्रदूषण हो रहा है, इसकी मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
विज्ञापन




सवाल : संस्थान में क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं?
जवाब : छात्रों को रिसर्च ओरिएंटिड पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाता है, जिसके लिए उन्हें स्टैंडर्ड लैब फैसिलिटी, कोर्स में समर इंटर्नशिप और रिसर्च प्रोजेक्ट आदि शामिल किया गया है। अगर बच्चे सिर्फ साइंस पढ़ेंगे तो दुनिया का पता नहीं लगेगा, हमें मशीन नहीं मानव तैयार करने हैं इसलिए आइसर में छह में से एक विभाग मानविकी का है। पांच साल के बीएस-एमएस इंटिग्रेटिड कोर्स में छात्र को कम से कम पांच मानविकी के विषय पढ़ने अनिवार्य हैं। इसके अलावा छात्रों के पास फिजिक्स, बायोलॉजी आदि कांबिनेशन चुन सकते हैं।

सवाल : शोधार्थियों के लिए आइसर कैंपस में क्या खास है?
जवाब : दवा का क्लिनिकल ट्रायल करने से पूर्व आमतौर पर उसे जानवरों पर टेस्ट किया जाता है और उसके लिए कैंपस में बेहतर प्री क्लिनिकल ट्रायल की सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्री-क्लिनिकल ट्रायल के लिए कैंपस में ट्रांसजेनिक जानवरों को रखने की सुविधा है जिनके लिए विशेष इंतजाम की जरूरत होती है। हमारी कोशिश है कि हम अपनी एमिनल फैसिलिटी को स्टेट ऑफ द आर्ट बनाएं और बद्दी आदि नजदीकी जगहों की कंपनियों को प्री-क्लिनिकल रिसर्च करने के लिए आमंत्रित करेंगे। इसके अलावा कैंपस में स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, कन्फोकल माइक्रोस्कोप, स्पैक्ट्रोस्कोपिक फैसिलिटीज आदि उपलब्ध है जिससे छात्रों को रिसर्च ओरिएंटिड पढ़ाई कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें