मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल में तीन सफल किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन किए गए हैं, जहां मरीजों के ब्लड ग्रुप भी एक से नहीं थे। ओम प्रकाश, संतोष कुमारी और सरोज को किडनी ट्रांसप्लांट के बाद नई जिंदगी मिली जो इससे पहले कई सालों से उनके लिए नामुमकिन सा था।
फोर्टिस मोहाली के इन्कंपैटिबल किडनी प्रोग्राम के सर्जिकल डायरेक्टर डॉ. प्रियदर्शिनी रंजन ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि अब ब्लड ग्रुप समान न होने पर भी सभी ब्लड ग्रुप्स में किडनी ट्रांसप्लांट करना मुमकिन है। डॉ. रंजन ने यूएसए के जॉन्स हॉप्किंस के इन्कंपैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर से ट्रेनिंग हासिल की है।
डॉ. रंजन ने बताया कि भारत में हमने हाल फिलहाल ही ऐसे पेचीदा किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी केस लेने शुरू किए हैं, जबकि विकसित देशों में यह एक रुटीन सा बन गया है।
उन्होंने बताया कि इन मरीजों के लिए ‘हॉप्किंस प्रोटोकॉल’ अपनाया गया है और हम हॉप्किंस के स्टैंडर्ड के हिसाब से अपनी एंटीबॉडी और प्लासमाफेरेसिस लैब्स भी विकसित कर रहे हैं।
डॉ. रंजन ने बताया कि सभी मरीजों को अब अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है और वह रुटीन में एक आम किडनी ट्रांसप्लांट प्रापक की तरह अपनी जिंदगी जी रहे हैं। अब तक कोई भी ट्रांसप्लांट मरीज किसी ऐसे व्यक्ति से अंग ले सकता था जिसका ब्लड ग्रुप उससे मेल खाता हो।