वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल, उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और इसकी वजह बने हैं मुख्यमंत्री। आईएएस खेमका ने 2016-17 की एसीआर में सीएम द्वारा रेटिंग घटाने और एडवर्स रिमार्क को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका पर तथा याचिका लंबित रहते इस टिप्पणी पर रोक लगाने की अपील वाली अर्जी पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
खेमका ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उन्होंने 2016-17 की अपनी परफॉरमेंस रिपोर्ट जून 2017 में चीफ सेक्रेटरी को भेजी थी और डीएस ढेसी ने उन्हें 10 में से 8.22 की रेटिंग दी थी। स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज ने इस रेटिंग को बढ़ाकर 9.22 करते हुए कहा था कि खेमका ने बेहद उम्दा काम किया है और उनकी इंटीग्रिटी के कारण रेटिंग बढ़ाई ही जानी चाहिए। जब यह रिपोर्ट सीएम मनोहर लाल के पास पहुंची तो उन्होंने रेटिंग घटाकर 9 कर दी।
इसके साथ ही सीएम ने कहा कि वे विज से सहमत नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री ने खेमका के काम को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया है। खेमका ने रिप्रजेंटेशन देते हुए रिमार्क हटाने की अपील की और इस अपील का विज ने भी समर्थन किया। नियम के अनुसार ऐसी रिप्रजेंटेशन पर निर्णय लेने के लिए अथॉरिटी के पास 15 दिन का समय होता है। निर्धारित समय में निर्णय न लेने पर उन्होंने रिमांडर भेजा लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। इसके चलते खेमका ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए इस टिप्पणी को और रेटिंग घटाने के निर्णय को चुनौती दे दी।
याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब कर लिया है। इसके बाद खेमका ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि उनकी एसीआर में फिलहाल यह टिप्पणी दर्ज है जिसका उनके कैरियर पर फर्क पड़ सकता है। ऐसे में याचिका के लंबित रहते इस टिप्पणी पर रोक लगाई जाए।
यह है मुश्किल
केंद्र में अतिरिक्त सचिव पद के लिए एक बैच के 20 प्रतिशत आईएएस का चयन होता है। 9 की रेटिंग अपने आप में अच्छी है लेकिन सीएम की टिप्पणी खेमका का रास्ता रोक सकती है इसलिए ही खेमका को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।