चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 के बाहर नो पार्किंग जोन में खड़े सैकड़ों दोपहिया और अन्य वाहनों की वजह से यहां एमरजेंसी में एंबुलेंस या किसी अन्य वाहन से पहुंचने वाले किसी भी मरीज के लिए यम के दूत न बन जाएं। क्योंकि यहां अस्पताल के नो पार्किंग जोन में बेतरतीब तरीके से खड़े हुए वाहनों की वजह से किसी भी एंबुलेंस या अन्य वाहन से पहुंचने वाले सीरीयस मरीजों को रास्ता ही नहीं मिलेगा तो वह अस्पताल में समय रहते कैसे पहुंच पाएंगे। इतना ही नहीं यहां व्याप्त वाहनों की भीड़भाड़ से किसी मरीज की जान भी जोखिम में जा सकती है। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर सैकड़ों की संख्या में दोपहिया वाहनों की कतार अक्सर देखने को मिल जाएगी। इसमें बड़ी लापरवाही यह है कि यह सभी दोपहिया वाहन नो पार्किंग जोन में खड़े रहते हैं और इनको रोकने वाला कोई नहीं है।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को अपनी पड़ताल में पाया कि अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर सुबह से लेकर अस्पताल के समय तक वाहनों की लंबी-लंबी कतार लगी रहती हैं। इन वाहनों में सैकड़ों की संख्या में में स्कूटर, मोटरसाइकिल और कारें खड़ी रहती है। जो यातायात में बाधा उत्पन्न करती हैं। अस्पताल के अंदर वाहनों का वन वे होने के कारण बाहर निकलने वाले वाहनों को भी यहां से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां व्याप्त वाहनों की भीड़भाड़ के चलते अगर भगवान न करे कोई एमरजेंसी में आने वाले मरीज की गाड़ी फंस गई तो उसे अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल के दोनों मुख्य द्वारों पर अपने सिक्योरिटी गार्ड बिठा रखे हैं ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही चंडीगढ़ पुलिस का नौ पार्किंग के बैरिकेड्स भी लगे हुए हैं। बावजूद इसके वाहन चालक यहां पर बिना किसी खौफ के वाहनों को घंटों तक यहां खड़ा रखते हैं। जो कि गलत है। वाहन चालकों को भी जनता को हो रही परेशानियों को देखते हुए अपने वाहनों को यहां नौ पार्किंग जोन में नहीं खड़ा करना चाहिए।
भीड़ में फंसी एंबुलेंस
शनिवा को दोपहर यहां पर एक एंबुलेंस बेतरतीब तरीके से नो पार्किंग जोन में खड़े हुए वाहनों के बीच में फंस गई। यहां पर वन वे होने के कारण अस्पताल के अंदर से गाडियां निकल रही थी और दूसरी तरफ से एंबुलेंस निकल रही थी। एंबुलेंस के ठीक सामने से दो गाड़ियां आ गई और एक गाड़ी एंबुलेंस के पीछे से आ गई। जल्दबाजी में सभी गाड़ियों ने पहले निकलने का प्रयास किया। मगर एंबुलेंस चालक की सूझबूझ से उसने एंबुलेंस निकाल ली।