हरियाणा के सांसदों और विधायकों को स्वैच्छिक कोटे के तहत हरियाणा अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) द्वारा प्लाट आवंटित करने के मामले में हाईकोर्ट ने वीरवार को सख्त टिप्पणी की।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अमोल रत्न सिंह की खंडपीठ ने कहा कि सरकार के सत्ता में आते ही अपने लोगों को फायदा पहुंचाना गलत है।
उन्होंने हरियाणा सरकार से सवाल किया कि जिन सांसदों, विधायकों को प्लाटों की जरूरत नहीं है, उन्हें प्लाट क्यों आवंटित किए गए।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण हैं कि संसद में बहस के बिना सरकार अपने स्तर पर ही निर्णय ले लेती है। मामले की अगली सुनवाई वीरवार को होगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सांसदों और विधायकों को प्लाट आवंटित नहीं किए जा सकते, लेकिन फायदा पहुंचाने के लिए प्लाट अलॉटमेंट करना गलत है।
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हरियाणा के मुख्य सचिव एससी चौधरी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर सांसदों और विधायकों का मौजूदा वेतन और भत्तों की जानकारी दी थी।
हेराल्ड ग्रुप हाउसिंग कॉपरेटिव सोसायटी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया है। याचिका में कहा गया है कि हरियाणा के 80 विधायकों और सांसदों को सेक्टर-6 स्थित मनसा देवी कांपलेक्स में 14 मरले के प्लाट उपलब्ध करवाए गए हैं।
यह प्लाट 28 लाख में दिए गए, जबकि बाजार में कीमत 1.5 करोड़ से ऊपर चल रही है। याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि प्लाट आवंटन की अधिसूचना को रद करने के निर्देश जारी किए जाएं।
इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन पर भी हुडा की खिंचाई
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-1 में प्लाट अलाटमेंट के मामले में हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है कि इस अलॉटमेंट पर क्यों न रोक लगाई दी जाए।
वीरवार को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत पर आधारित खंडपीठ ने हुडा का पक्ष सुनने के बाद नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 13 मई निर्धारित की है।
मामले की सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने दलील दी कि हरियाणा अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) ने पिछले साल जुलाई में यह प्लाट अलॉट किए थे।
यह प्लाट खुद मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सिफारिशों पर अलॉट किए गए। आरोप लगाया गया कि कुल 14 प्लाटों में से 11 प्लाट करीबियों को दिए गए।
इन 11 प्लाटों में से एक मुख्यमंत्री के रिश्तेदार, दो सत्तासीन दल के नेताओं के रिश्तेदारों और एक हाईकोर्ट के जज की बहु को अलॉट हुआ है।
इन प्लाटों में 1000 स्कवेयर मीटर का प्लाट 64 लाख और 496 स्कवेयर मीटर का प्लाट 31.74 लाख का है। उन्होंने कहा कि बाजार में इस समय 1000 स्कवेयर मीटर की कीमत 6 करोड़ से ऊपर चल रही है।
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की तरफ से दलील दी गई कि मेरिट लिस्ट के आधार पर यह अलॉटमेंट हुआ है। मेरिट के लिए साक्षात्कार, वित्तीय योग्यता और प्रोडक्ट कैपेबिलिटी स्किल्स के तहत यह मैरिट तैयार की गई है।
पंचकूला निवासी एसके जैन एवं अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया है।
याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि इस अलॉटमेंट को रद करने के निर्देश जारी किए जाएं।
याचिका में अलॉटमेंट प्रक्रिया को गैर कानूनी ठहराया गया है।