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एचएसजीपीसी के गठन पर सोनिया, राहुल की सहमति

Sun, 02 Mar 2014 10:00 AM IST
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी हरियाणा की अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) गठित करने पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत हो गए हैं।
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दोनों इस मसले पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जल्द बातचीत करेंगे। यह दावा हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने शनिवार को अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में किया।

डॉ. तंवर ने बताया कि वह तीन-चार दिन पहले इस मांग के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष से मिले थे। चंडीगढ़ पहुंचे राहुल गांधी से भी इस बारे में बातचीत की गई थी।
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इस मांग के संबंध में उन्हें बताया गया था कि हरियाणा के सिखों की यह मांग जायज है। बेशक ,यह धार्मिक मामला भी है, मगर यह हरियाणा के सिखों की तरक्की का मामला भी है।

हरियाणा का पैसा हरियाणा में ही लगे, यहीं पर स्कूल, कॉलेज खुलें। इसलिए अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाना जरूरी है। तंवर ने कहा कि ये बातें सुनने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने अलग कमेटी गठित करने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष इस मसले पर प्रधानमंत्री से भी बात करेंगे। इसके साथ ही वह स्वयं भी इस बारे में बात करेंगे। उन्होंने कहा कि इस विषय पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी उन्होंने बात की है।

हरियाणा कांग्रेस प्रभारी डॉ. शकील अहमद भी अलग कमेटी बनाने की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि  लोकसभा चुनाव की घोषणा होने में बहुत कम समय बचा है, मगर कांग्रेस सरकार की कोशिश रहेगी कि लोकसभा चुनाव से पहले इसका सकारात्मक परिणाम निकल आए। यदि पहले न निकला, तो चुनाव के बाद जरूर परिणाम निकले।

कांग्रेस ने किया था वादा, मगर पूरा नहीं हुआ
हरियाणा कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद हरियाणा की अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गठित की जाएगी।

तत्कालीन स्पीकर और वर्तमान वित्त मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी। तीन लाख सिखों ने अलग कमेटी गठित करने के लिए अपनी सहमति दी थी।

चट्ठा कमेटी ने अलग कमेटी गठित करने की सिफारिश की हुई है। मगर, अचानक शीर्षस्थ नेतृत्व से ऐसा दबाव आया कि यह मामला लटक गया। अब तकनीकी तौर पर चट्ठा कमेटी की सिफारिश पर एडवोकेट जनरल की राय ली जा रही है।
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यह राय कई साल से वांछित है। यदि सोनिया गांधी और राहुल गांधी प्रधानमंत्री से इसके लिए हां करवा दें, तो अलग कमेटी होना तय है।
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