नगर निगम, पंचकूला के हाउस की सोमवार को होने वाली मीटिंग में अविश्वास प्रस्ताव रखे जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।
चंद घंटे पहले बैठक की सूचना मिलने और एक ही दिन दो बैठकें आयोजित करने के फैसले का वार्ड 6,7, 11 के पार्षदों ने विरोध किया है। एक घंटे के अंतराल में होने वाली पहली बैठक में बजट पर चर्चा होगी तो दूसरे सामान्य बैठक होगी।
उन्होंने निगम प्रशासन पर आरोप लगाया कि चुनाव के बाद से विकास कार्यों के लिए किसी भी परियोजना को सिरे नहीं चढ़ाया गया। अन्य वार्डों के लिए पिछले एक साल के दौरान अब तक डेढ़ करोड़ की राशि स्वीकृृत किए जाने के बाद विकास कार्यों को अमली जामा पहनाया जा रहा है।
शनिवार को एक होटल में संवाददाताओं से बातचीत में वार्ड छह, सात और 11 के पार्षदों ने संबंधित वार्डों में विकास के नाम पर खर्च करने के लिए राशि नहीं दिए जाने पर निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है।
वार्ड छह की पार्षद सीमा देवी के पति प्रेम कुमार के मुताबिक, उनके वार्ड में न तो स्ट्रीट लाइटें लगाई गई और न ही सफाई का इंतजाम किया गया। जब ग्रामीण क्षेत्रों को निगम में शामिल किया गया तो विकास कार्यों के लिए अब तक फंड क्यों नहीं दिया गया।
वार्ड सात के पार्षद विनोद कुमार ने कहा कि उन्हें विकास कार्यों के लिए अब तक राशि नहीं दी गई हैं। वार्ड 11 की पार्षद कांता देवी के पति ने कहा कि निगम में शामिल किए जाने के बावजूद विकास कार्य नहीं करवाए गए।
उधर, वार्ड 13 के पार्षद रविकांत स्वामी और पिंजौर से पार्षद सतिन्दर टोनी ने इस मीटिंग के आयोजन पर ही सवाल उठा दिया है।
उनका कहना है कि एजेंडा तैयार करने से पहले पार्षदों से विकास कार्य संबंधी सुझाव क्यों नहीं मांगे गए। बैठक से 48 घंटे पहले मीटिंग की सूचना मिलनी चाहिए, जबकि एक पार्षद ने 45 घंटे पहले एजेंडा रिसीव किया। अभी भी कई पार्षदों तक एजेंडा की कॉपी भी नहीं पहुंची है।
टोनी ने सवाल उठाया है कि आखिरकार एक ही दिन में दो बैठकें कैसे हो सकती हैं। वार्ड 13 के पार्षद रविकंात स्वामी ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए कहा कि मीटिंग में पार्षदों की राय नहीं ली गई।
बैठक में वार्ड तीन की पार्षद सुरजीत कौर के पति चमनलाल ने कहा कि विकास कार्य धीमी गति से हो रहा है, जबकि हाउस की मीटिंग में कई तरह से नियमों की अनदेखी की जा रही है।
पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर बैठक से पहले उनकी राय नहीं ली गई और जानकारी भी देरी से दी गई तो उस मीटिंग में किस मुद्दे पर बातचीत होगी। अधिकारियों की तरफ से थोपी गई बातों पर चर्चा होगी तो पार्षद को मनोनीत किए जाने का क्या फायदा।
अविश्वास प्रस्ताव के लिए 11 पार्षद एकजुट
पार्षदों और विकास कार्यों में हुई अनदेखी से नाराज पार्षदों के तेवर को देखकर ऐसा लग रहा है कि सोमवार को होने वाली बैठक में अविश्वास प्रस्ताव भी रखा जा सकता है।
नाराज पार्षदों का कहना है कि जनरल हाउस की तीसरी बैठक में प्रस्ताव को रखने के लिए 14 पार्षदों का समर्थन चाहिए, जबकि 11 अभी भी एकजुट हैं।
विकास में की गई अनदेखी तो अभियान क्यों चलाया
वार्ड छह के पार्षद के पति और पूर्व सरपंच ने कहा कि नगर निगम की ओर से कुछ जगहों पर हाउस टैक्स वसूले गए, लेकिन बाद में नए गांवों में इसे माफ कर दिया गया। लेकिन, पशुओं को पकड़ने की बारी आती है तो गांवों से पशुओं को क्यों पकड़ा जाता है।
अगर, विकास कार्यों के लिए राशि नहीं देकर वार्ड की अनदेखी की जा रही है तो आखिरकार पशुओं को पकड़ने का अभियान क्यों चलाया गया। वार्ड में सफाई, स्ट्रीट लाइट सहित कई और बुनियादी समस्याओं से अभी भी लोग जूझ रहे हैं। फिर निगम में शामिल किए जाने के बावजूद आखिरकार क्यों तीनों वार्ड की अनदेखी की जा रही है।
अगर अनाधिकृत क्षेत्र हैं तो क्यों चुने गए पार्षद
वार्ड छह, सात और 11 के पार्षद और उनके प्रतिनिधियों ने सरकार और नगर निगम प्रशासन पर आरोप लगाया कि अगर उन वार्डों में अनाधिकृत कालोनियां है और सर्वे किया जा रहा है, तो पार्षदों का क्यों चुना गया।
विकास कार्यों के नाम पर शून्य होने के बावजूद आखिरकार चुनाव में जनता से वोट कैसे मांगेंगे। नगर निगम के गठन के बाद 42 पंचायतों को इसमें शामिल किया गया। 12 वार्डों के तहत पंचायतें हैं, जिनमें कुछेक में विकास कार्य कराए गए, क्योंकि शहरी क्षेत्र भी उनमें शामिल हैं। लेकिन तीन वार्डों में विकास कार्य के लिए डेढ़ करोड़ की मंजूरी के बावजूद इस मद में राशि खर्च नहीं की गई।
वार्ड छह की पार्षद सीमा देवी के पति योगेन्द्र कुमार और वार्ड 11 की पार्षद कांता देवी के पति प्रेम कुमार ने कहा कि इन वार्डों में पार्षदों को चुनकर उनकी अनदेखी की गई है। इससे पूरे इलाके के लोगों में पार्षद अब जवाब देने की स्थिति में भी नहीं हैं, क्योंकि विकास के वादे सभी झूठे साबित हुए हैं, जिसकी जिम्मेवारी नगर निगम प्रशासन की है।
कुछ क्षेत्र अनाधिकृत हैं, जिसके वैध कराने के लिए स्थानीय शहरी निकाय मंत्री को पत्र भेज दिया गया है। जल्द ही इस संबंध में उनसे मुलाकात कर हल निकाला जाएगा, ताकि सभी क्षेत्रों में बराबरी से विकास हो सके। पार्षदों को तीन हफ्ते पहले ही इस्टीमेट तैयार करने को कहा गया था और उसी आधार पर एजेंडा तैयार किया गया है।
उपिन्दर अहलूवालिया, मेयर, नगर निगम, पंचकूला