हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) की पहली कार्यकारिणी की बैठक में कमेटी ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार के हुक्मनामे को दरकिनार करते हुए हरियाणा में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अधीन चल रहे आठ गुरुद्वारों के मैनेजरों से रिकॉर्ड तलब कर लिया है।
इसके साथ ही एसजीपीसी द्वारा काटे गए चेकों को कैश करने पर भी रोक लगा दी है। जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने गत 27 जुलाई को हरमंदिर साहिब में प्रस्तावित बैठक रद्द होने के अगले ही दिन फरमान सुनाया था कि हरियाणा के गुरुद्वारों की व्यवस्था पहले की तरह की जारी रखी जाए।
वीरवार को एचएसजीएमसी की बैठक में आठ गुरुद्वारों के मैनेजरों को 2 अगस्त को शाम 5 बजे तक कैथल के नीम साहिब गुरुद्वारे में एचएसजीएमसी के हेड ऑफिस में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। आदेश का पालन नहीं करने वाले मैनेजरों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी कार्यकारिणी ने जारी की है।
एसजीपीसी के चैकों के पास करने पर रोक
बैठक में उक्त निर्णय के अलावा सात अन्य प्रस्ताव भी पारित किए। बैठक अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में झींडा ने बताया कि एसजीपीसी के नियंत्रण में चल रहे 8 गुरुद्वारों के लेन-देन का काम देख रहे बैंक मैनेजरों को पत्र जारी किया गया है।
इसके साथ ही एसजीपीसी द्वारा काटे गए चैकों के पास करने पर रोक लगा दी गई है। यदि किसी बैंक मैनेजर ने गुरुद्वारे के मैनेजर द्वारा काटे गए चैक को पारित कर किया तो बैंक मैनेजर व गुरुद्वारा मैनेजर के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रस्ताव पारित कर कुरुक्षेत्र में कार्यालय बनाए जाने तक कैथल के गुरुद्वारा नीमसाहिब में हेड ऑफिस बनाने का फैसला किया गया है।
एक अन्य प्रस्ताव पारित कर सहारनपुर दंगों की निंदा करते हुए पीड़ितों को मुआवजा और दोषियों को सजा दिलाने की मांग करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के सीएम अखिलेश यादव को पत्र लिखने का फैसला किया गया है।
बैठक में कई प्रस्ताव पास
झींडा ने कहा कि कार्यकारिणी ने एक प्रस्ताव में हरियाणा के गुरुद्वारों पर एसजीपीसी द्वारा किए गए कब्जे और वहां हथियारबंद लोगों को बैठाए जाने की निंदा की गई है और इस मामले में पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल व एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ को पत्र लिखकर इन लोगों को गुरुद्वारों से हटाने का आग्रह किया है।
झींडा ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को भी पत्र लिखकर मांग की गई है कि श्री अकाल तख्त द्वारा एसजीपीसी और अकाली दल बादल को हरियाणा के गुरुघरों में दखल रोकने को कहा जाए।
उन्होंने बताया कि बैठक में ही एचएसजीएमसी के लिए केंद्र सरकार से पाक जाने वाले जत्थों में कोटा फिक्स कराने, धमतान साहिब से दिल्ली तक रास्ते को गुरु तेग बहादुर शहीदी मार्ग का नाम देने और हरियाणा में छोटे साहिबजादों का भव्य स्मारक बनवाने संबंधी प्रस्ताव भी पारित किए गए।
विवाद हुआ तो बादल होंगे जिम्मेदार : झींडा
झींडा ने हरियाणा के गुरुद्वारों में डटी टास्क फोर्स और अकाली कार्यकर्ताओं द्वारा गुरुघरों को छोड़ने के लिए कोई समय सीमा तय करने से इंकार करते हुए कहा कि वे शुरू से ही अपील करते आ रहे हैं कि प्रदेश के सिखों को उनका हक दिया जाए। फिर भी अगर कोई विवाद पैदा होता है तो इसके लिए प्रकाश सिंह बादल जिम्मेवार होंगे।
झींडा ने श्री अकाल तख्त द्वारा एचएसजीएमसी द्वारा गुरुघरों की सेवा संभाल पर लगाई गई रोक के हुक्मनामे के बारे में पत्रकारों से कहा कि एचएसजीएमसी द्वारा गुरुघरों पर कोई कब्जा या धक्केशाही नहीं की जा रही। कानूनी तरीके से प्रदेश के सिखों का हक लिया जा रहा है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
बैठक में एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा, महासचिव जोगा सिंह, संयुक्त सचिव भूपेंद्र सिंह असंध के अलावा कार्यकारिणी के पांच सदस्य- हरपाल सिंह पाली उपाध्यक्ष, अवतार सिंह चक्कू, जगदेव सिंह, स्वर्ण सिंह, संत बलजीत सिंह दादूवाल, संत गुरमीत सिंह तिलोकवाले एवं मोहनजीत सिंह मौजूद रहे। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीदार सिंह नलवी नहीं पहुंचे।