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'आप' ने फिर उठाई ईवीएम की जांच की मांग, बोले- लोकतंत्र को भाजपा से खतरा

Wed, 05 Apr 2017 12:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आप नेता एचएस फुल्का की प्रेस कांफ्रेंस - फोटो : File Photo
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आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर दोहराया है कि पिछले दिनों हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ की गई। पार्टी ने मांग की है कि जिन ईवीएम के साथ वोटर वैरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) का प्रयोग किया गया, उनका सत्यापन किया जाए।
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विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एचएस फूलका ने कहा कि मध्य प्रदेश केभिंड में उप चुनाव के लिए ट्रायल के दौरान ईवीएम से जुड़ी वीवीपैट से भाजपा केचुनाव चिन्ह वाली परची बाहर आई। इससे आप के आरोप साबित हो गए हैं कि भाजपा ने ईवीएम से छेड़छाड़ की है।

आप के राष्ट्रीय कनवीनर अरविंद केजरीवाल ने यह मुद्दा केंद्रीय चुनाव आयोग के समक्ष उठाया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आप और कांग्रेस ने दिल्ली नगर निगम चुनाव में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर का इस्तेमाल करने की मांग की थी। हालांकि दिल्ली चुनाव आयोग ने उसे खारिज कर दिया। फूलका ने कहा कि अब कांग्रेस का नैतिक दायित्व है कि वह वीवीपैट से जुड़ी ईवीएम के सत्यापन की आप की मांग का समर्थन करे। 
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'एमपी में ईवीएम में गड़बड़ी के बाद लोकतंत्र को भाजपा से खतरा'

आप नेता एचएस फूल्का
उन्होंने कहा कि ईवीएम केसाथ छेड़छाड़ भाजपा की चुनावी सिस्टम को हाईजैक करने की बड़ी साजिश है, लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। लोकतंत्र के मामले में सभी सियासी पार्टियों को स्टैंड लेना चाहिए। फूलका ने मांग की कि जब तक ईवीएम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, सभी चुनाव में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाए। 

एससी आयोग में पद खाली : कैंथ
पंजाब में आम आदमी पार्टी के सूबा उपप्रधान परमजीत सिंह कैंथ ने कहा है कि अनुसूचित जाति केलोगों को दबाने में भाजपा और आरएसएस सबसे आगे रहे हैं। भाजपा ने हमेशा इस वर्ग को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को इस वर्ग के लोगों की रक्षा के लिए बनाया गया था। पर इसकेचेयरमैन का पद अक्तूबर-2016, वाइस चेयरमैन का पद नवंबर-16 से खाली पड़ा है। कई मेंबरों के पद भी खाली पड़े हैं। इसे साफ है कि मोदी सरकार, एससी वर्ग के लोगों के हितों को लेकर कितनी चिंतित है। एससी वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा को बने आयोग के महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय भी कुछ नहीं कर रहा है। 
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