को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटीज में फ्लैट ट्रांसफर के लिए प्रशासन ने नई पॉलिसी बना दी है। अब सोसायटी के लीज होल्ड फ्लैट भी ट्रांसफर हो सकेंगे। हालांकि ट्रांसफर फीस को प्रशासन ने सीधा दोगुणा कर दिया है। इसके अलावा भी कई नियम शर्तें पॉलिसी में शमिल की हैं। फ्लैट चाहे फ्री होल्ड हो या लीज होल्ड दोनों केलिए कन्वींस डीड करवाना जरूरी होगा। चंडीगढ़ में 112 ग्रुप ऑफ हाउसिंग सोसायटिज हैं। जिनमें 15 हजार के करीब फ्लैट्स हैं।
कन्वींस डीड केबाद ही ट्रांसफर
किसी भी सोसायटी में फ्लैट तभी ट्रांसफर होंगे जब उसकी कन्वींस डीड हो चुकी होगी। साथ ही अलॉटी के फ्लैट की भी कन्वींस डीड होनी जरूरी है। कन्वींस डीड के लिए रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी (डीसी) के पास रजिस्ट्रेशन फीस भी अदा करनी होगी। इसके अलावा फ्लैट ट्रांसफर करने वाले अलॉटी को अपनी सोसायटी की मैनेजमेंट केपास 31 हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस भी जमा करवानी होगी।
सोसायटी को एनओसी केलिए देना होगा विज्ञापन
किसी भी सोसायटी में अलॉटी तभी अपना फ्लैट ट्रांसफर कर सकता है जब उसकी सोसायटी उसको एनओसी देगी। इसके लिए सोसायटी को 30 दिन पहले नोटिस देकर अखबार में विज्ञापन भी देना होगा। बताना होगा कि उक्त अलॉटी का कोई बकाया नहीं है। साथ ही किसी को फ्लैट ट्रांसफर से आपत्ति नहीं है यह भी बताना होगा। कोई फ्लैट ट्रांसफर करने से पहले सोसायटी को रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी से पहले मंजूरी भी लेनी होगी।
2014 में बंद हुआ था लीज होल्ड ट्रांसफर
2014 में रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी कम डीसी ने ऑर्डर जारी कर लीज होल्ड प्रापर्टी को तब तक बंद कर दिया था जब तक वह फ्लैट फ्री होल्ड नहीं होगा। अब फ्लैट के फ्री होल्ड होने की शर्त को खत्म कर दिया गया है।
यह होगी ट्रांसफर फीस
केटेगरी...ट्रांसफर फीस पहले.....अब
ए.........50 हजार.........1 लाख
बी.........25 हजार.........50 हजार
सी.........15 हजार.........30 हजार
कन्वींस डीड हर अलॉटी की अलग से व्यक्तिगत होनी चाहिए। इससे जो अलॉटी अपना फ्लैट ट्रांसफर करना चाहता है उसका बोझ सोसायटी केबाकी अलॉटी पर न पड़े। कन्वींस डीड के लिए सभी अलॉटी से सोसायटी को खर्च एकत्र करना मुश्किल होगा।
प्रदीप भारद्वाज, उपाध्यक्ष, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन सेक्टर-50
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प्रशासन ने फीस को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। साथ ही ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को भी पेचीदा कर दिया है। सोसायटी को पहले सभी अलॉटी से पैसे इक्ट्ठा करने होंगे। जो काफी मुश्किल है। उसके बाद कन्वींस डीड करवानी होगी। इससे ट्रांसफर नहीं करवाने वाले अलॉटी पर भी खर्च का भार पड़ेगा।
कमल गुप्ता, चेयरमैन, हाउसिंग सोसायटी रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन, चंडीगढ़।