सीबीआई की जांच ने हाउसिंग बोर्ड के भविष्य के प्रोजेक्टों पर संकट के बादल छा गए हैं अब हाउसिंग बोर्ड जल्दबाजी में कोई भी नई हाउसिंग स्कीम लांच करने के लिए तैयार नहीं है जबकि बोर्ड ने दिवाली से पहले सेक्टर- 51 में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत 128 टू बीएचके फ्लैट्स की स्कीम और शहर के अलग अलग खाली पड़े 53 फ्लैट्स को ई नीलामी के द्वारा बेचने की तैयारी कर ली थी।
लेकिन सेक्टर-63 के हाउसिंग प्रोजेक्ट की सीबीआई जांच के कारण अब इन प्रोजेक्ट्स की लाचिंग में रुकावट आ गई है। इन्हें लांच करने से पहले प्रपोजल को दोबारा से स्टडी किया जा रहा है।
काफी लंबे समय से इंतजार कर रहे है शहरवासी इस स्कीम का
सेक्टर-51 की 128 फ्लैट्स की स्कीम का शहरवासी काफी लंबे समय से इंतजार कर रहे है। इस स्कीम के लिए ब्रोशर की शर्तों को फाइनल कर दिया गया है। सिर्फ ब्रोशर को छपने के लिए आर्डर दिया जाना है। टूबीएचके फ्लैट्स की कीमत 70 लाख रुपये तय कर दी गई है।
इसके साथ ही शहर के अलग अलग जगह में 53 फ्लैट्स की नीलामी ई बोली से करने की योजना थी इन फ्लैट्स का रिजर्व प्राइस भी तय कर दिया गया है। इनमे ईडब्लयूएस से लेकर टू बीचएके के फ्लैट्स शामिल हैं । ये वे फ्लैट्स हैं जो कई सालों से अलग अलग सेक्टरों में खाली पड़े हैं।
इनका रिजर्व प्राइस बोर्ड ने 17 लाख से 80 लाख रुपये तक तय किया गया है। विदेशो में बैठे लोग भी इस स्कीम का इंतजार कर रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड की ओर से अगले साल सेक्टर-53 और 54 में भी 4 हजार फ्लैट्स का निर्माण करने की योजना बनाइ गई थी अब सीबीआई के डर से इस स्कीम में भी देरी होगी। हाउसिंग बोर्ड ने आईटी पार्क की 123 एकड़ जमीन पर भी हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने का भी प्रस्ताव है।
लोगों के काम भी हो रहे है प्रभावित
सीबीआई की जांच के कारण लोगों के काम भी प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि बोर्ड के अधिकतर अधिकारी सीबीआई के सवालों के जवाब तैयार कर रहे है। जबकि बोर्ड की ओर से हाल ही में मकानों को ट्रांसफर करने की तत्काल सुविधा शुरू की है।
इस स्कीम पर भी पडेगा प्रभाव
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने सेल्फ फाइनेंस हाउसिंग स्कीम के लिए शहर के साथ लगते पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में भी प्रोजेक्ट का निर्माण करने का निर्णय लिया था। बोर्ड ने सीधे किसानों से जमीन खरीदने का प्रस्ताव बनाया है। लेकिन अब इस योजना में भी बाधा आ गई है।
जल्दबाजी की जरूरत नहीं: कौशिक
बोर्ड के सदस्य प्रेम कौशिक का कहना है कि अब सीएचबी को कोई भी नई स्कीम लांच जल्दबाजी में लांच नहीं करनी चाहिए ताकि बाद में किसी भी तरह का जांच का सामना न करना पड़े।