22 साल की प्रिया इस फेस्टिवल सीजन में घर के लिए एलईडी खरीदने का मन बना रही हैं, लेकिन उनके पति राहुल अपने लिए महंगा स्मार्ट फोन खरीदना चाहते हैं।
सीमित आमदनी, बजट और घर के अन्य खर्चों के कारण दोनों में से किसी एक के पास समझौता करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है। या तो घर पर एलईडी ही आएगा सकेगा या महंगा फोन। या फिर उनके पास एक दूसरा विकल्प है किश्तों में मंथली पेमेंट।
इस फेस्टिवल सीजन में कई गैर बैंकिंग कंपनियां स्पेशल ऑफर लेकर आईं हैं। इसके तहत इस सीजन में शॉपिंग के लिए वह लोगों को फेस्टिवल लोन उपलब्ध करवाती हैं। यह एक तरह से पर्सनल लोन ही माना जाता है।
वहीं सरकारी और निजी बैंक भी इस फेस्टिव सीजन में कम प्रोसेसिंग शुल्क के साथ लोन ऑफर करते हैं। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां भी इलेक्ट्रिकल और घरेलू सामान पर ग्राहकों को जीरो प्रतिशत लोन की सुविधा देतीं हैं।
इसके तहत ग्राहकों को कुछ एडवांस पेमेंट करने पर बाकी का भुगतान हर महीने आसान किस्तों में चुकाने का ऑफर दिया जाता है। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड से खरीद करने और उसकी ईएमआई बनवाकर बाद में किस्तों में चुकाना भी एक स्मार्ट शॉपिंग का विकल्प है।
यह आसान और सुविधाजनक है। लेकिन, अगर आप बैंक से फेस्टिव या पर्सनल लोन लेते हैं तो आपको पेमेंट के लिए लंबा वक्त मिलता है।
वित्त मामलों की सलाहकार अमनजोत कौर के अनुसार ज्यादा शॉपिंग में पर्सनल लोन का फायदा यह है कि इसकी पेमेंट के लिए लंबी अवधि मिलेगी। इसे चुकाने के लिए पांच साल तक मिल सकते हैं, जबकि क्रेडिट कार्ड की 6 से 18 महीने की ईएमआई होतीं हैं।
कार्ड से खरीदारी का एक नुकसान यह है कि जब तक आप पूरी ईएमआई नहीं चुकाते, आपके कार्ड की उतनी सीमा कम हो जाएगी। इसके अलावा अगर आपके क्रेडिट कार्ड पर पहले से कोई ईएमआई चल रही हैं और आपने उनमें से किसी एक की भी किस्त मिस कर दी तो आपको जुर्माना दोनों ईएमआई पर लगेगा।
डिफॉल्ट के मामले में जुर्माना 40 फीसदी तक हो सकता है। हालांकि क्रेडिट कार्ड पर ईएमआई का ऑप्शन बेहतर है। कुछ क्रेडिट कार्ड में ईएमआई पर शून्य फीसदी ब्याज दर होती है।