मौके पर पड़ा छत का मलबा।
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तब तक अजय के जुड़वां बच्चों (बेटा और बेटी) की मौत हो चुकी थी। अजय और माधवी को पास के एक अस्पताल में ले जाया गया लेकिन रास्ते में ही दोनों ने दम तोड़ दिया। नैना को जब मलबे से बाहर निकाला गए तो उसकी सांस चल रही थी। उसे अस्पताल में दाखिल करवा दिया गया। छत का मलबा और लोहे के गार्डर अजय, माधवी और जुड़वां बच्चों पर गिरने के कारण उनके सिर और मुंह में गंभीर चोटें आई थी। सभी के सिर से खून बह रहा था।
स्थानीय पार्षद परमजीत चोपड़ा ने घटना पर गहरा दुख जताया है। घटना के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे थे। पुलिस ने लाशों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। घायल नैना की जिला प्रशासन हरसंभव मदद कर रहा है। आसपास के लोगों ने बताया कि पहले भी जब बारिश होती थी तो अजय के घर से पानी टपकता था। हर बार वह मिट्टी की ट्रॉली छत पर डाल देता था। जिस कारण छत उस मिट्टी के भार को सहन नहीं कर सकी।