किसान आंदोलन की तपिश में पंजाब का होटल उद्योग बुरी तरह झुलस रहा है। किसान संघर्ष ने इस उद्योग को हाशिए पर ला दिया है। सूबे में होटलों का व्यापार 45 फीसदी तक गिर गया है। हालात यह है कि खर्च तक निकालना मुश्किल हो रहा है। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ पंजाब ने सरकार से आग्रह किया है कि किसानों की जायज मांगों का समाधान करके आंदोलन को खत्म कराया जाए, ताकि सूबे के कारोबार फिर से पटरी पर लौट सकें।
किसानों ने अपनी मांगों को लेकर करीब 12 दिन से केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। देश के अन्य राज्यों को जोड़ने वाली तीन सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन चल रहा है। इस वजह से सड़क यातायात भी प्रभावित है। सूबे में हाईवे जाम करने का सिलसिला भी चल रहा है, नतीजतन आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कोई भी व्यक्ति सूबे की यात्रा करने से गुरेज कर रहा है।
सूबे में करीब पांच हजार होटल
पंजाब होटल एंड रोस्टोरेंट एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंट अमरवीर सिंह कहते हैं कि सूबे में करीब पांच हजार होटल हैं। किसान आंदोलन से पहले सूबे के होटलों का अधिग्रहण दर 70 फीसदी से अधिक थी और उद्योग बेहतर ढंग से काम कर रहा था। लेकिन किसान आंदोलन के कारण दूसरे राज्यों से कारोबारियों एवं पर्यटकों का यहां आना काफी कम हो गया है। इस वजह से होटलों के कमरों की मांग में लगातार गिरावट देखी जा रही है। हालत यह है कि लोगों ने पहले से की हुई बुकिंग भी रद्द करा दी है। इसके अलावा नई बुकिंग भी नहीं मिल रही है, ऐसे में होटल उद्यमियों के लिए खर्च तक निकालना मुश्किल हो रहा है।
होटल उद्योग को करारा झटका
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ पंजाब के कैशियर अमरजीत सिंह का तर्क है कि किसान आंदोलन ने होटल उद्योग को करारा झटका दिया है। लंबा खिंचता किसान आंदोलन उद्यमियों के गले की फांस साबित हो रहा है। उद्यमियों के लिए बैंक से लिए कर्ज की किश्तें तक देना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा स्टाफ का वेतन तक जेब से देने की नौबत आ रही है। यदि सरकार ने शीघ्र ही समाधान न किया तो इस उद्योग के समक्ष अस्तित्व का संकट पैदा हो जाएगा।