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होटल-डिस्कोथेक और पब में कारोबार ठप, मोमबत्ती जलाकर जताया विरोध

Mon, 03 Apr 2017 09:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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होटल-डिस्कोथेक और पब में कारोबार ठप - फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर लगातार दूसरे दिन शहर की हैपनिंग और जॉयफुल लाइफ स्टाइल पर देखने को मिला। संडे को शहर के होटलों, पब, बार, लाउंज या डिस्कोथेक पर दिखने वाली भीड़ नदारद ही रही। इनका कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया। फैसले से खफा चंडीगढ़ के होटल इंडस्ट्री ने एकजुट होकर अपने-अपने होटलों के आगे कैंडल जलाकर शांतिपूर्ण विरोध किया। इसमें होटल का स्टाफ भी मौजूद रहा।
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होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन चंडीगढ़ के प्रेसिडेंट अरविंदर पाल सिंह के अनुसार होटल, पब, बार मालिकों में कोर्ट के इस आदेश के बाद से मायूसी है। इस तरह रहा तो उन्हें अपना व्यवसाय चौपट होता नजर आ रहा है। रविवार को सभी प्रभावित होटल मालिकों ने मीटिंग कर फैसला लिया कि जब तक उन्हें लेकर कोई फैसला नहीं हो जाता, वे रोजाना अपने-अपने होटलों के बाहर कर्मचारियों के साथ विरोध स्वरूप कैंडल मार्च करेंगे।

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से उनका कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है। कुछ कर्मचारियों को मजबूरी में निकालना पड़ रहा है तो कुछ खुद ही छोड़कर अन्य शहरों में जाने को मजबूर हैं। वहीं उनके अनुसार इस समस्या को लेकर रविवार को हुई बैठक के बाद एक प्रतिनिधिमंडल सांसद किरण खेर सेे भी मिला और इस बारे में अवगत करवाया।
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डिस्कोथेक की सेल डेढ़ लाख से दस हजार पर आई

प्लाजा में सांकेतिक विरोध आज
प्लाजा में सांकेतिक विरोध आज
अरविंदर पाल सिंह के अनुसार आदेश की जद में आए शहर के सभी होटल मालिक सोमवार को फैसले के विरोध स्वरूप सेक्टर-17 स्थित नीलम थिएटर के सामने प्लाजा में सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में मोहाली और पंचकूला के होटल व्यवसायी भी शामिल होंगे। उनका कहना है कि चंडीगढ़ में जिन होटलों और रेस्टोरेंट्स को नेशनल हाईवे के दायरे में बताया गया है, वह गलत है। हमारी सुप्रीम कोर्ट से मांग है कि चंडीगढ़ को लेकर एक बार फिर से सोचा जाए।

डिस्कोथेक की सेल डेढ़ लाख से दस हजार पर आई
शहर के युवाओं की धड़कन सभी डिस्कोथेक, पब बार, लाउंज लगातार दूसरे दिन खाली रहे। सेटर्डे और संडे अक्सर फुल रहने वाली इन जगहों पर एक अप्रैल से लिकर बंद होने से युवा आ ही नहीं रहे हैं। सेक्टर-17 स्थित बज डिस्कोथेक के मैनेजर पाली शर्मा ने बताया कि आमतौर पर शनिवार और रविवार को एक से डेढ़ लाख रुपये तक सेल पहुंच जाती है, लेकिन दो दिन में यह दस हजार तक आकर सिमट गई है।

बाउंसरों की नौकरी पर तलवार
सेटर्डे या संडे की पार्टी में आमतौर पर पहले एक क्लब में 30 से 40 कर्मियों का स्टाफ होता था, लेकिन अब यह सिमटकर चंद कर्मियों तक रह गया है। वहीं कई जगह रविवार को पब मालिकों ने बाउंसरों को बुलाया ही नहीं। सेक्टर-26 स्थित एक पब संचालक ने बताया कि पैसे नहीं आएंगे तो वह स्टाफ को कैसे पेमेंट करेंगे। लिकर नहीं होगी तो बाउंसरों को बुलाने का भी कोई औचित्य नहीं है। ऐसे में उनकी नौकरी पर भी खतरा मंडरा रहा है। शहर के अधिकतर डिस्कोथेक में रविवार दोपहर हुई पार्टी बिना बाउंसरों की मौजूदगी में ही हुई। 
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